Chhotu Singh Encounter : प्रयागराज में एक बार फिर पुलिस ने दिखाया अपना दम! एक खतरनाक मुठभेड़ में कुख्यात गैंगस्टर आशीष रंजन उर्फ छोटू सिंह को ढेर कर दिया गया। छोटू सिंह कोई छोटा-मोटा बदमाश नहीं था, बल्कि झारखंड से लेकर यूपी और बिहार तक उसका खौफ फैला हुआ था। इस मुठभेड़ में पुलिस ने उसके पास से AK-47 जैसे खतरनाक हथियार भी बरामद किए, जो बताता है कि वो कितनी बड़ी साजिश रचने की फिराक में था। आइए, जानते हैं इस खूंखार अपराधी की पूरी कहानी।
कौन था आशीष रंजन उर्फ छोटू सिंह?
आशीष रंजन, जिसे छोटू सिंह के नाम से जाना जाता था, झारखंड के धनबाद का रहने वाला था। ये कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि एक ऐसा गैंगस्टर था, जिसके नाम से लोग कांपते थे। उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी और जान से मारने की धमकी जैसे कई गंभीर मामले दर्ज थे। पुलिस उसे लंबे समय से तलाश रही थी और उसकी गिरफ्तारी के लिए इनाम भी रखा गया था। छोटू सिंह को पकड़ना पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था।
बड़े-बड़े हत्याकांडों का था मास्टरमाइंड
छोटू सिंह का नाम झारखंड के दो बड़े हत्याकांडों में सामने आया था। पहला था नीरज तिवारी हत्याकांड और दूसरा लाला खान हत्याकांड। ये दोनों मामले अपने समय में काफी सुर्खियों में रहे थे। इन हत्याओं ने साबित कर दिया था कि छोटू सिंह नाम में भले छोटा हो, लेकिन उसके अपराध बहुत बड़े थे। पुलिस के पास पुख्ता सबूत थे कि इन हत्याओं के पीछे उसी का हाथ था।
अमन सिंह गैंग का था खास सिपाही
छोटू सिंह झारखंड के कुख्यात अमन सिंह गैंग का एक्टिव मेंबर था। ये गैंग लंबे समय से झारखंड और आसपास के इलाकों में अपराध की दुनिया में सक्रिय है। छोटू सिंह इस गैंग का एक अहम हिस्सा था और कई बड़ी वारदातों को अंजाम दे चुका था। उसकी गैंग के साथ मिलीभगत ने उसे और भी खतरनाक बना दिया था।
जेल में रहकर भी चलाता था अपराध का साम्राज्य
छोटू सिंह को एक बार पुलिस ने पकड़कर धनबाद मंडल कारा में डाल दिया था। लेकिन जेल की सलाखों के पीछे भी उसका रौब कम नहीं हुआ। वहां से भी वो अपने गैंग के जरिए बाहर की वारदातों को अंजाम देता था। पुलिस को शक था कि जेल में रहते हुए भी वो कई बड़ी साजिशें रच रहा था। उसका ये जलवा अपराध की दुनिया में उसे और खास बनाता था।
यूपी-बिहार में भी फैला था खौफ
छोटू सिंह का आतंक सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं था। यूपी और बिहार में भी उसने कई बड़े अपराध किए। पुलिस के मुताबिक, वो इन राज्यों में बार-बार वारदातों को अंजाम देता और हर बार चकमा देकर भाग निकलता था। उसकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि पुलिस के लिए उसे पकड़ना आसान नहीं था। लेकिन इस बार किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया।
मुठभेड़ में हुआ खेल खत्म
प्रयागराज में पुलिस को खुफिया जानकारी मिली कि छोटू सिंह किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में है। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और उसे घेर लिया। जब पुलिस ने उसे पकड़ने की कोशिश की, तो उसने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं और इस मुठभेड़ में छोटू सिंह मारा गया। उसके पास से बरामद AK-47 जैसे हथियारों ने साफ कर दिया कि वो कितनी खतरनाक साजिश रच रहा था।









