देहरादून, 08 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड की सियासत में जुबानी जंग तेज हो गई है, जहां भाजपा ने कांग्रेस के जॉइनिंग दावों और आंतरिक कलह पर चौतरफा घेराबंदी शुरू कर दी है। भाजपा विधायक और प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने कांग्रेस के दावों को ‘हवाई शिगूफा’ करार देते हुए कहा कि विपक्षी दल में इस वक्त महाभारत छिड़ी हुई है।
उन्होंने तंज कसा कि कांग्रेस के स्वघोषित ‘भीष्म पितामह’ (हरीश रावत) अब अपनी ही पार्टी के ‘कौरवों’ पर टूट पड़े हैं, जिससे पार्टी का ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है।
पार्टी मुख्यालय में मीडिया से मुखातिब होते हुए चमोली ने कहा कि कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा का उत्तराखंड दौरा भाजपा के लिए फायदेमंद साबित होगा। उन्होंने हरियाणा विधानसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सैलजा की मौजूदगी और गुटबाजी ने कांग्रेस की लुटिया डुबोई थी। भाजपा प्रवक्ता के मुताबिक, उत्तराखंड में भी प्रभारी के आने से आपसी ‘सिर फुटौव्वल’ बढ़ेगी और अंततः इसका लाभ भाजपा को ही मिलेगा।
हरीश रावत के ‘राजनीतिक अवकाश’ पर कड़ा प्रहार करते हुए चमोली ने इसे शुद्ध रूप से ‘दबाव की राजनीति’ बताया। उन्होंने इतिहास खंगालते हुए याद दिलाया कि रावत ने तिवारी सरकार से लेकर बहुगुणा सरकार तक हमेशा अपनी ही पार्टी को अस्थिर करने का काम किया। चमोली ने सीधा आरोप लगाया कि आज कांग्रेस पार्टी रावत परिवार के लिए महज एक ‘प्लेसमेंट एजेंसी’ बन गई है, जहां पत्नी, बेटी और अब बेटों को सेट करने के लिए सारा प्रपंच रचा जा रहा है।
कांग्रेस के उन दावों पर जिनमें भाजपा नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है, चमोली ने दो टूक कहा कि ये वो लोग हैं जो पिछले चुनाव में ही भाजपा से बाहर हो चुके थे। वर्तमान में उनकी कोई सक्रियता नहीं है और कांग्रेस डूबती नैया को बचाने के लिए ऐसे पुराने चेहरों का सहारा ले रही है।
गौरतलब है कि 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद से ही उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर सांगठनिक बदलावों को लेकर खींचतान जारी है। हालिया आंकड़ों और राजनीतिक घटनाक्रम को देखें तो कांग्रेस के कई दिग्गज चेहरे पहले ही भाजपा का दामन थाम चुके हैं। चमोली ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जनता अब ‘हरदा’ की रग-रग से वाकिफ है और 2027 के चुनाव में भी कांग्रेस के हाथ खाली ही रहने वाले हैं।









