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Dehradun News : दून इंटरनेशनल स्कूल की छात्रा के अपहरण की खबर निकली फर्जी, पुलिस ने बताई सच्चाई

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देहरादून पुलिस और दून इंटरनेशनल स्कूल प्रबंधन ने छात्रा के अपहरण के प्रयास की वायरल खबर को पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन करार दिया है। एसएसपी देहरादून के निर्देश पर हुई जांच में सामने आया कि गांधी शताब्दी अस्पताल के बाहर एक महिला मरीज छात्राओं से केवल फीस और पढ़ाई के बारे में सामान्य पूछताछ कर रही थी, जिसे गलत समझा गया। पुलिस ने बिना पुष्टि के सनसनीखेज खबरें फैलाने से बचने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

Dehradun News : शिक्षा की नगरी कहे जाने वाले देहरादून में पिछले 24 घंटे से एक प्रतिष्ठित स्कूल की छात्रा के अपहरण के प्रयास की खबर ने हड़कंप मचा रखा था। डालनवाला स्थित दून इंटरनेशनल स्कूल (DIS) के बाहर छात्रा को वैन में खींचने और इंजेक्शन लगाने की कहानियों ने अभिभावकों की नींद उड़ा दी थी।

हालांकि, देहरादून पुलिस और स्कूल प्रबंधन की संयुक्त जांच में यह पूरा मामला ‘फर्जी’ और ‘गलतफहमी’ का नतीजा निकला है। एसएसपी देहरादून द्वारा मामले का तत्काल संज्ञान लेने के बाद सामने आया कि जिस घटना को अपहरण की बड़ी साजिश बताया जा रहा था, उसमें रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है।

सोशल मीडिया और अखबारों में क्या दावा किया गया था?

शहर में यह खबर आग की तरह फैली थी कि शनिवार दोपहर छुट्टी के बाद घर जा रही 11वीं की छात्रा को स्कूल गेट से कुछ दूरी पर एक वैन सवार बुर्काधारी ने खींचने की कोशिश की। अफवाहों में यहां तक दावा किया गया कि आरोपी ने छात्रा की बांह पर इंजेक्शन लगाने का प्रयास किया और सहेलियों के शोर मचाने पर वह भाग गया।

इस खबर ने डालनवाला जैसे पॉश इलाके और अभिभावकों के बीच बच्चों की सुरक्षा को लेकर गहरा डर पैदा कर दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स में इसे दिल्ली-एनसीआर के किडनैपिंग गैंग की दस्तक तक बता दिया गया था।

पुलिस जांच में खुली पोल: न वैन, न इंजेक्शन

इस सनसनीखेज खबर का संज्ञान लेते हुए एसएसपी देहरादून ने तुरंत स्थानीय पुलिस को स्कूल प्रबंधन से संपर्क करने और सीसीटीवी खंगालने के निर्देश दिए। जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो गया। पुलिस द्वारा स्कूल प्रबंधन और आसपास के लोगों से पूछताछ में पता चला कि घटना 07 फरवरी 2026 की है, लेकिन उसका स्वरूप वैसा बिल्कुल नहीं था जैसा बताया गया।

जांच अधिकारियों के अनुसार, गांधी शताब्दी अस्पताल (जो स्कूल के पास है) के गेट के बाहर एक महिला मरीज खड़ी थी। उसके हाथ में कोई इंजेक्शन नहीं, बल्कि पानी की बोतल थी। उसने स्कूल से निकल रही कुछ छात्राओं को केवल रोका और उनसे स्कूल की पढ़ाई व फीस के संबंध में सामान्य जानकारी मांगी थी।

गलतफहमी से पैदा हुआ ‘किडनैपिंग’ का हौवा

पुलिस जांच में यह साफ हुआ कि छात्राओं ने महिला मरीज के सवाल-जवाब को गलत समझ लिया या फिर संवाद में हुई गलतफहमी के कारण यह बात ‘अपहरण के प्रयास’ के रूप में फैल गई। कथित तौर पर बुर्काधारी द्वारा वैन में खींचने की बात सीसीटीवी फुटेज और मौके की जांच में कहीं भी साबित नहीं हुई। एक साधारण बातचीत को बिना तथ्यों की पुष्टि किए अपहरण की बड़ी साजिश का रूप दे दिया गया, जिससे शहर में अनावश्यक तनाव का माहौल बन गया।

स्कूल प्रबंधन और पुलिस का आधिकारिक बयान

दून इंटरनेशनल स्कूल प्रबंधन ने भी इस खबर का आधिकारिक खंडन किया है। प्रबंधन ने पुलिस को स्पष्ट किया कि समाचार पत्रों में बिना पुष्टि के प्रकाशित खबर में कोई सच्चाई नहीं है। पहले जहां स्कूल की तरफ से शिकायत देने की बात कही जा रही थी, वहीं अब स्थिति स्पष्ट होने पर प्रबंधन ने अभिभावकों को आश्वस्त किया है।

देहरादून पुलिस ने सख्त लहजे में कहा है कि बिना तथ्यों की जांच किए इस तरह की संवेदनशील खबरें प्रकाशित या प्रसारित करना कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है। पुलिस ने शहरवासियों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही ऐसी किसी भी भ्रामक खबर पर विश्वास न करें और न ही उसे फॉरवर्ड करें। शहर में कोई भी ‘किडनैपिंग गैंग’ सक्रिय नहीं है और बच्चे पूरी तरह सुरक्षित हैं।

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