देहरादून के धौलास में मुस्लिम संस्थान के लिए आवंटित जमीन को लेकर भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर बड़े आरोप लगाते हुए इसे आईएमए की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने दावा किया कि यह भूमि मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने की पुरानी साजिश का हिस्सा है और अब भूमाफिया इसे खुर्द-बुर्द करने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा ने सरकार से इस आवंटन को तत्काल निरस्त कर जमीन वापस सरकारी कब्जे में लेने की पुरजोर अपील की है।
Dehradun News : देहरादून के सहसपुर धौलास क्षेत्र में मुस्लिम शिक्षण संस्थान के लिए आवंटित करीब 100 बीघा जमीन को लेकर उत्तराखंड की सियासत गर्मा गई है। भाजपा के वरिष्ठ विधायक और प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से वार्ता करते हुए इस मामले में कांग्रेस सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस स्थान पर यह जमीन आवंटित की गई है, वह भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) जैसे अति-संवेदनशील परिसर से सटी हुई है, जिससे देश की सुरक्षा को सीधा खतरा हो सकता है। भाजपा ने धामी सरकार से अपील की है कि इस जमीन के आवंटन को तुरंत निरस्त कर इसे वापस सरकारी नियंत्रण में लिया जाए।
2004 में तिवारी सरकार के फैसले पर सवाल
विनोद चमोली ने जानकारी दी कि साल 2004 में तत्कालीन नारायण दत्त तिवारी सरकार ने मोहम्मद मदनी को शिक्षण कार्य के लिए यह 100 बीघा जमीन लीज पर दी थी। भाजपा का आरोप है कि तब से ही इस जमीन का लैंड यूज बदलवाने के लगातार प्रयास किए जा रहे थे।
मामला हाईकोर्ट तक भी पहुंचा, लेकिन वहां से आपत्तियां खारिज होने के बाद अब इसे भूमाफियाओं के जरिए खुर्द-बुर्द करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकारों ने हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा दिया है, जिसका नतीजा आज सबके सामने है।
मुस्लिम यूनिवर्सिटी की साजिश का हिस्सा
भाजपा प्रवक्ता ने इस पूरे प्रकरण को प्रदेश में मुस्लिम यूनिवर्सिटी खोलने की पुरानी साजिश से जोड़ा। उन्होंने याद दिलाया कि 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी सहसपुर इलाके में मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने की चर्चा जोरों पर थी, जिसे हरीश रावत सरकार का मौन समर्थन प्राप्त था।
चमोली ने कहा कि भाजपा के विरोध और जनता द्वारा कांग्रेस को नकारे जाने के कारण उनकी यह मंशा पूरी नहीं हो पाई। अब धौलास में जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी का खेल उजागर होने से साफ हो गया है कि पर्दे के पीछे क्या खिचड़ी पक रही थी।
सेना की आपत्ति को किया गया नजरअंदाज
विधायक चमोली ने बताया कि जब इस जमीन का आवंटन हुआ था, तब भी सेना की ओर से सुरक्षा कारणों को लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई गई थी। इसके बावजूद तत्कालीन कांग्रेस सरकारों ने राष्ट्रीय सुरक्षा को ताक पर रखते हुए आवंटन को रद्द नहीं किया। वर्तमान में एमडीडीए द्वारा जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने के कदम की उन्होंने सराहना की।
उन्होंने चेतावनी दी कि देवभूमि के देवत्व और यहां के सांस्कृतिक स्वरूप को बचाने के लिए कांग्रेस की ऐसी विचारधारा से राज्य को मुक्त करना बेहद जरूरी है, अन्यथा प्रदेश की डेमोग्राफी खतरे में पड़ जाएगी।









