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Digital Gold Investment : अब सोना खरीदने की ज़रूरत नहीं, डिजिटल गोल्ड से ऐसे बढ़ेगा मुनाफा

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Digital Gold Investment : पहले के जमाने में सोने में निवेश का मतलब था चमचमाते गहने, चकाचौंध भरे सिक्के या भारी-भरकम बार खरीदना। लेकिन दोस्तों, वक्त कितना तेजी से बदल गया है।

टेक्नॉलजी ने निवेश के सारे पुराने रास्ते तुड़वा दिए हैं। अब (Digital Gold) जैसी चीजें सोने को सिर्फ भौतिक रूप तक सीमित नहीं रखतीं, बल्कि डिजिटल दुनिया और मार्केट के ढेर सारे नए रंग-रूप सामने ला दी हैं।

आजकल लोग बिना एक ग्राम सोना हाथ में लिए ही लाखों-करोड़ों रुपये लगा देते हैं। उन्हें सोने की चमकती कीमतों से फायदा तो मिलता ही है, ऊपर से चाहें तो उसी दिन या अगले कारोबारी दिन अपना निवेश बेचकर पैसे निकाल भी लें।

धनतेरस और दिवाली जैसे त्योहारों के इस धमाकेदार मौसम में तो हर कोई सोना खरीदने की होड़ में लगा रहता है। लेकिन अगर आपका दिल सिर्फ निवेश से मुनाफा कमाने में है और गहने बनवाने का कोई इरादा नहीं, तो चिंता मत करो। आपके पास सोने में (Digital Gold) निवेश के ढेर सारे आसान डिजिटल विकल्प मौजूद हैं, जो बिना झंझट के काम आ जाएंगे।

डिजिटल गोल्ड: छोटे से शुरू करो, बड़ा फायदा पाओ

(Digital Gold) वो जादुई तरीका है जो असली सोने से सीधा जुड़ा होता है। इसकी कीमतें भी वैसी ही उछाल-झटके खाती रहती हैं। अच्छी बात ये कि इसमें कोई मेकिंग चार्ज या स्टोरेज का झमेला नहीं। आप इसे 24 घंटे, हफ्ते के सातों दिन खरीदो या बेचो। बस, 1 रुपये से भी निवेश की शुरुआत कर दो। चाहो तो एकमुश्त (Lump Sum) डाल दो या SIP की तरह थोड़ा-थोड़ा जोड़ते जाओ।

टैनिश्क के मुताबिक, जब आप (Digital Gold) बेचते हो, तो पैसे सीधे बैंक खाते में आ जाते हैं। और हां, अगर मन बदले तो इसे असली सोने में बदलवा लो। ये (Digital Gold) निवेश का वो आसान रास्ता है, जो हर किसी के बजट में फिट बैठ जाता है।

गोल्ड ईटीएफ: शेयर बाजार की तरह खेलो, सोना कमाओ

(Gold ETF) वो स्मार्ट निवेश है, जो असली सोने पर टिका होता है, लेकिन आपको सोना अपने पास रखने की टेंशन नहीं लेनी पड़ती। इसे शेयर मार्केट में शेयरों की तरह खरीदो-बेचो। बस, इसके लिए डीमैट अकाउंट (Demat Account) चालू रखना जरूरी है। ये कम खर्च वाले (Low Expense) और तेजी से बिकने वाले (High Liquidity) ऑप्शन हैं।

अनंद राठी वेल्थ लिमिटेड के डायरेक्टर चिराग मुनी कहते हैं कि सोने में पैसा लगाने वालों के लिए (Gold ETF) सबसे धांसू विकल्प है। इसमें स्टोरेज, इंश्योरेंस या मेकिंग चार्ज जैसी कोई अतिरिक्त लागत नहीं। उन्होंने ये भी बताया कि (Gold ETF) (Digital Gold) से ज्यादा लचीलापन देते हैं और खर्च भी कम, इसलिए लंबे समय के लिए ये सोने का कमाल कर देते हैं।

मिसाल के तौर पर, निप्पॉन इंडिया ईटीएफ गोल्ड बीईएस – जो भारत का सबसे पुराना (Gold ETF) है – ने 2007 से अब तक करीब 950% का रिटर्न दिया है। यानी 10 लाख रुपये का निवेश 18 सालों में 1 करोड़ से ज्यादा हो गया।

गोल्ड म्यूचुअल फंड: नए खिलाड़ियों के लिए आसान एंट्री

(Gold Mutual Funds) भी (Gold ETF) में ही पैसा लगाते हैं। यहां आप एकमुश्त निवेश करो या SIP से चलाइयो, दोनों ठीक। ये नए निवेशकों के लिए बेस्ट हैं, जो सीधे सोना खरीदने से कतराते हैं। हां, इनका खर्च अनुपात (Expense Ratio) (Gold ETF) से थोड़ा ऊंचा होता है, जिससे रिटर्न में मामूली फर्क पड़ सकता है।

लेकिन फिर भी, पिछले 10 सालों में एबीएसएल गोल्ड डायरेक्ट प्लान ने 15.86% का औसत सालाना रिटर्न दिया। मतलब, 10 लाख का निवेश 10 साल में 44 लाख से ज्यादा बन गया। (Gold Mutual Funds) वो सुरक्षित रास्ता है, जहां बिना ज्यादा सोचे निवेश शुरू कर दो।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स: सरकार का वादा, डबल फायदा

(Sovereign Gold Bonds) या SGBs को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) केंद्र सरकार की तरफ से जारी करता है। ये 999 शुद्ध सोने पर बने होते हैं। इनकी मैच्योरिटी 8 साल की है, लेकिन 5 साल बाद रिडीम कर लो। अभी नई स्कीम ओपन नहीं हुई, लेकिन सेकेंडरी मार्केट (Secondary Market) से इन्हें पकड़ लो।

यहां सोने की कीमत बढ़ने का फुल फायदा मिलता है, प्लस हर साल 2.5% ब्याज भी जुड़ जाता है। (SGBs) वो सरकारी गारंटी वाला निवेश है, जो (Digital Gold) या (Gold ETF) से अलग मजा देता है।

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