देहरादून, 08 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। राजधानी के प्रतिष्ठित राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में अनुशासन की धज्जियां उड़ाते हुए सीनियर्स ने एक बार फिर मानवता को शर्मसार किया है। एमबीबीएस प्रथम वर्ष के एक छात्र ने आरोप लगाया है कि उसके सीनियर्स उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित (Doon Medical College Ragging Case) कर रहे थे, जिसमें उसकी धार्मिक पहचान से जुड़ी दाढ़ी और बाल कटवाने का फरमान सुनाया गया।
पीड़ित छात्र के मुताबिक, यह उत्पीड़न पिछले कई दिनों से लगातार जारी था, लेकिन डर के मारे वह खामोश रहा। जब सीनियर्स की दबंगई इस हद तक बढ़ गई कि उन्होंने छात्र की व्यक्तिगत पहचान को निशाना बनाया, तब उसने हिम्मत जुटाकर एंटी रैगिंग सेल का दरवाजा खटखटाया।
प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच टीम गठित कर दी है। कॉलेज प्रशासन ने एनॉटमी, फीजियोलॉजी और बॉयोकेमेस्ट्री जैसे प्रमुख विभागों के विभागाध्यक्षों (एचओडी) को आधिकारिक पत्र जारी कर इस प्रकरण पर इनपुट मांगे हैं।
कॉलेज का इतिहास इस साल रैगिंग के मामले में काफी दागदार रहा है। बीते जनवरी माह में ही यहां रैगिंग की दो बेहद हिंसक घटनाएं दर्ज की गई थीं, जहां छात्रों को जूतों, चप्पलों और बेल्टों से बुरी तरह पीटा गया था। उस दौरान भी कई छात्रों पर भारी जुर्माना और निष्कासन जैसी कठोर कार्रवाई की गई थी, लेकिन ताजा घटना ने साबित कर दिया है कि वह सख्ती नाकाफी थी।
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के कड़े दिशा-निर्देशों के बावजूद, दून मेडिकल कॉलेज में हॉस्टल वार्डन और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच तालमेल की भारी कमी नजर आ रही है। कैंपस के भीतर फ्लाइंग स्क्वायड की मुस्तैदी पर भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि सीनियर छात्रों की हनक अभी भी कम होने का नाम नहीं ले रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल की पढ़ाई का भारी तनाव और ऊपर से इस तरह का अमानवीय व्यवहार छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालता है। प्राचार्य डॉ. जैन ने स्पष्ट किया है कि कॉलेज में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति है और रिपोर्ट आते ही दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।









