EMI Default : अक्सर हम पैसे की किल्लत में सोचते हैं कि एक EMI छोड़ देते हैं, अगले महीने भर देंगे। लेकिन यहीं से असली सिरदर्द शुरू हो जाता है! थोड़ी सी देरी और पेनल्टी-लेट फीस लग जाती है। फिर पता ही नहीं चलता कि ये छोटा-मोटा कर्ज कब बड़ा बोझ बन जाता है।
जैसे ही आपकी EMI बाउंस होती है, लेंडर (बैंक या NBFC) फटाक से इसकी खबर क्रेडिट ब्यूरो (जैसे CIBIL) को भेज देता है। बस एक EMI डिफॉल्ट से आपका क्रेडिट स्कोर (Credit Score) तेज रफ्तार से लुढ़क जाता है। स्कोर गिरा तो आगे चलकर नया लोन या क्रेडिट कार्ड पाना मुश्किल हो जाता है। हां, मिलेगा भी तो आसमान छूती ब्याज दर पर।
कर्ज का मानसिक बोझ जो नींद उड़ा देता है
कर्ज सिर्फ जेब पर नहीं, दिमाग पर भी भारी पड़ता है। EMI देर से भरने का तनाव रातों की नींद चुरा लेता है। सबसे ज्यादा खलता है जब बैंक या रिकवरी एजेंट की फोन की बौछार शुरू हो जाती है। लोग शर्मिंदगी महसूस करने लगते हैं, भले ही लोन किसी जरूरी काम के लिए लिया हो – जैसे इलाज या पढ़ाई। EMI डिफॉल्ट की ये परेशानी किसी को भी तोड़ सकती है।
क्यों फंस जाते हैं ज्यादातर लोग?
ज्यादातर लोग इसी जाल में फंसते हैं क्योंकि या तो खर्चे अचानक फूट पड़ते हैं (जैसे मेडिकल इमरजेंसी), या क्रेडिट कार्ड का बेतरतीब इस्तेमाल कर बैठते हैं। कई बार हाई-इंटरेस्ट पर्सनल लोन (Personal Loan) की ब्याज दर को ठीक से न समझने की भूल हो जाती है। खराब प्लानिंग से छोटा कर्ज भी EMI डिफॉल्ट का पहाड़ बन जाता है। क्रेडिट स्कोर (Credit Score) को बचाने के लिए प्लानिंग जरूरी है।
बचाव के आसान कदम – घबराएं नहीं, एक्शन लें
इससे बचने का पहला कदम है अपनी हालत को मान लें और फौरन लेंडर (बैंक या NBFC) से बात करें। डरें नहीं, उनसे EMI रीस्ट्रक्चरिंग के बारे में पूछें – जैसे लोन की मुश्किल बढ़ाकर EMI कम करवाना। सबसे बड़ा नियम: पुराने कर्ज चुकाने के चक्कर में नया लोन न लें, ये समस्या को दोगुना कर देता है।
अब बजट पर कड़ा रुख अपनाएं। बेकार खर्चे काटें और सबसे महंगे लोन को पहले निपटाएं। अगर खुद प्लान न सूझे तो फाइनेंशियल काउंसलर की मदद लें। कोशिश करें कि हाई-इंटरेस्ट EMI से जल्द आजादी मिले। क्रेडिट स्कोर (Credit Score) सुधारने के ये टिप्स आपकी जिंदगी आसान बना देंगे।









