EU Ethanol Ban India : यूरोपीय संघ (ईयू) इथेनॉल वाले प्रोडक्ट्स पर बैन लगाने की सोच रहा है, और ये खबर भारत में हड़कंप मचा रही है। ये फैसला यूरोपीय केमिकल एजेंसी (ईसीएचए) की रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें इथेनॉल को कैंसर का खतरा बताया गया है।
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि इससे सिर्फ हैंड सैनिटाइजर और क्लीनिंग प्रोडक्ट्स ही नहीं प्रभावित होंगे, बल्कि भारत जैसे देशों में इथेनॉल मिक्स फ्यूल की बढ़ती पॉपुलैरिटी पर भी ब्रेक लग सकता है। लेकिन भारतीय एक्सपर्ट्स का मानना है कि नॉर्मल यूज में इथेनॉल से कोई फौरन खतरा नहीं है।
इथेनॉल का सबसे कॉमन यूज हैंड सैनिटाइजर और अब फ्यूल मिक्सिंग में हो रहा है। कोरोना के बाद से सैनिटाइजर हमारी रोज की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं, तो सवाल उठना लाजमी है – क्या ये प्रोडक्ट्स हेल्थ के लिए रिस्की हैं?
ईसीएचए के एक इन्टरनल वर्किंग ग्रुप ने 10 अक्टूबर को इथेनॉल को टॉक्सिक सब्सटेंस डिक्लेयर करने की रेकमेंडेशन दी थी, जिसमें कैंसर रिस्क बढ़ने और प्रेग्नेंसी कॉम्प्लिकेशंस का जिक्र था।
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट कहती है कि ईयू अब इथेनॉल को बायोलॉजिकल हार्मफुल प्रोडक्ट्स (जैसे सैनिटाइजर) में रिप्लेस करने पर विचार कर रहा है। एजेंसी की बायोसाइडल प्रोडक्ट्स कमिटी 25 से 27 नवंबर तक इस पर मीटिंग करेगी, उसके बाद यूरोपीय कमीशन फाइनल डिसीजन लेगा।
ईयू में इथेनॉल को कैंसरजन्य, म्यूटेजेनिक या रिप्रोटॉक्सिक कैटेगरी में डालने की प्रोसेस 2000 से चल रही है, लेकिन हालिया अस्सेसमेंट ने इसे नया ट्विस्ट दिया है। ग्रीस ने मार्च 2024 में सबमिट रिपोर्ट में इथेनॉल के सैनिटाइजर, सरफेस क्लीनिंग और फूड इंडस्ट्री यूज की रिव्यू की थी। अगर ये क्लासिफिकेशन हो गया, तो कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स में इथेनॉल पर ऑटोमैटिक बैन लग सकता है।
भारत पर संभावित प्रभाव
भारत में ये न्यूज खासतौर पर बेंगलुरु जैसे शहरों में टेंशन बढ़ा रही है, जहां इथेनॉल फ्यूल ब्लेंडिंग और सैनिटेशन में बड़े स्केल पर यूज हो रहा है। न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल जलने से एसिटाल्डिहाइड और फॉर्मेल्डिहाइड जैसी टॉक्सिक गैसें निकल सकती हैं, जो कैंसर से लिंक हैं।
मगर रिपोर्ट में ही आशा हॉस्पिटल्स एंड रिसर्च सेंटर के ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. श्रीनाथ ने कहा, “इथेनॉल फ्यूल नैचुरली ज्यादा हानिकारक नहीं है। ये टोटल पॉल्यूटेंट मिक्स पर डिपेंड करता है, और इथेनॉल दूसरे टॉक्सिक एलिमेंट्स को कम कर सकता है।”
भारत सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी (20% टारगेट) पर ये बैन इम्पैक्ट डाल सकता है, क्योंकि ईयू हमारा बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है। कॉस्मेटिक इंडस्ट्री, खासकर परफ्यूम और लोशन सेक्टर में इथेनॉल का यूज हेवी है।
अगर बैन लगा, तो यूरोपीय प्रोड्यूसर्स को लॉस होगा, लेकिन ग्लोबल सप्लाई चेन हिट हो सकती है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अल्टरनेटिव केमिकल्स की सर्च अब जरूरी है, लेकिन ये ऑप्शंस महंगे और कम इफेक्टिव हो सकते हैं।
“अत्यधिक सेवन से जुड़े अध्ययन के आधार पर निष्कर्ष”
इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सोप्स, डिटर्जेंट एंड मेंटेनेंस प्रोडक्ट्स (एआईएसई) ने क्लियर किया है कि यूरोपीय स्टडीज ज्यादातर हैवी अल्कोहल कंजम्प्शन पर बेस्ड हैं। मतलब, ये रिस्क उन पर अप्लाई होता है जो लॉन्ग टर्म और हाई क्वांटिटी में इथेनॉल इनटेक करते हैं, न कि टॉपिकल यूजर्स पर।
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) इथेनॉल को हैंड क्लीनिंग के लिए सेफ मानता है, लेकिन ईयू की रेकमेंडेशन ने डिबेट शुरू कर दी है। अल्कोहल एंड कैंसर यूरोप की रिपोर्ट कहती है कि सैनिटाइजर में इथेनॉल का यूज ड्रिंकिंग की तुलना में मिनिमल रिस्क वाला है। फिर भी, प्रेग्नेंट वुमेन और सेंसिटिव ग्रुप्स के लिए लॉन्ग एक्सपोजर से डेंजर हो सकता है।









