देहरादून। राजधानी के एक स्थानीय होटल में आयोजित ‘आज तक उत्तराखंड कॉन्क्लेव’ के मंच से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विरोधियों को कड़ा संदेश और युवाओं को नई उम्मीद दी। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि उनकी सरकार केवल वादे नहीं करती, बल्कि ठोस धरातल पर काम कर रही है। उन्होंने राज्य की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए सुशासन और पारदर्शिता को अपनी प्राथमिकता बताया।
सीएम धामी ने अपनी सरकार की सबसे बड़ी जीत ‘सख्त नकल विरोधी कानून’ को करार दिया। उन्होंने कहा कि पहले की व्यवस्थाओं में युवाओं का भरोसा टूट चुका था, लेकिन इस कानून ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पवित्रता लौटाई है। धामी ने आंकड़ों के साथ बताया कि अब तक 30,000 से अधिक युवाओं को मेरिट के आधार पर सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं। यह आंकड़ा राज्य के इतिहास में एक मील का पत्थर है।
समान नागरिक संहिता यानी UCC पर मुख्यमंत्री का रुख बेहद स्पष्ट दिखा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने इस ऐतिहासिक कानून को जमीन पर उतारा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, “UCC की गंगा अब उत्तराखंड से निकलकर पूरे देश में प्रवाहित होनी चाहिए।” ताज़ा आंकड़ों की बात करें तो UCC लागू होने के बाद राज्य में विवाह पंजीकरण की दर में अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई है, जो पहले औसतन 67 प्रतिदिन थी और अब बढ़कर 1,400 के पार पहुंच गई है।
महिला सशक्तिकरण की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने ‘जेंडर बजट’ का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राज्य ने महिलाओं के लिए 19,000 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया है। ‘लखपति दीदी’ योजना के तहत 2.65 लाख महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा चुका है। सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है कि पहाड़ की महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को जड़ से मजबूत किया जाए।
संवेदनशील मुद्दों पर भी मुख्यमंत्री ने खुलकर बात की। चर्चित अंकिता भंडारी मामले में उन्होंने निष्पक्ष जांच और न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही, अग्निवीर योजना के तहत राज्य के युवाओं के लिए किए गए विशेष आरक्षण और रोजगार प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सेना से लौटने वाले जवानों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए राज्य सरकार प्राथमिकता के आधार पर नीतियां बना चुकी है।
मुख्यमंत्री ने अंत में निवेश, पर्यटन और डिजिटल गवर्नेंस पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश को ‘ग्लोबल योग कैपिटल’ और सीमावर्ती गांवों को ‘देश का पहला गांव’ मानकर विकास की नई इबारत लिखी जा रही है। 128 जनजातीय गांवों के समग्र विकास के साथ-साथ होमस्टे योजना के जरिए पलायन रोकने की कोशिशें अब रंग ला रही हैं। चमोली जैसे जिलों में ही 800 से अधिक होमस्टे आज हजारों लोगों को रोजगार दे रहे हैं।









