देहरादून, 07 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में आस्था के सबसे बड़े महापर्व ‘चारधाम यात्रा’ के शुरू होने में अब गिनती के दिन बचे हैं, लेकिन धरातल पर ईंधन का संकट गहराता जा रहा है। एक तरफ 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट खुलने की तैयारी है, तो दूसरी तरफ रसोई गैस की किल्लत ने होटल और ढाबा संचालकों की नींद उड़ा दी है।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए इसे पर्यटन के लिए ‘डेथ वारंट’ करार दिया है। उन्होंने साफ कहा कि अगर सरकार ने समय रहते आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की, तो राज्य के राजस्व की रीढ़ मानी जाने वाली यह यात्रा पटरी से उतर जाएगी।
गोधियाल ने हरिद्वार और अन्य यात्रा रूटों का हवाला देते हुए चौंकाने वाला दावा किया है। उनके मुताबिक, कई होटल व्यवसायियों ने बताया कि गैस की अनिश्चितता और किल्लत के डर से यात्रियों ने अपनी एडवांस बुकिंग्स रद्द करना शुरू कर दिया है।
“जब ढाबों और होटलों में खाना बनाने के लिए सिलेंडर ही नहीं होंगे, तो हम दुनिया भर से आने वाले श्रद्धालुओं की मेजबानी कैसे करेंगे? सरकार का इस गंभीर मुद्दे पर मौन रहना समझ से परे है।” – गणेश गोदियाल, अध्यक्ष, उत्तराखंड कांग्रेस
गौरतलब है कि इस बार चारधाम यात्रा के लिए ईंधन की मांग पिछले सालों के मुकाबले कहीं अधिक रहने वाली है। सरकारी आंकड़ों और अनुमानों के मुताबिक, इस साल मई और जून के पीक सीजन में करीब 18 से 20 लाख एलपीजी सिलेंडरों की जरूरत पड़ेगी। पिछले साल इसी अवधि में लगभग 16.41 लाख सिलेंडरों की खपत हुई थी।
जमीनी हकीकत यह है कि प्रदेश के कई पहाड़ी इलाकों में दुकानदार अब लकड़ी और कोयले के पारंपरिक चूल्हों पर लौटने को मजबूर हैं। गैस की कालाबाजारी की शिकायतों ने व्यापारियों के बीच हाहाकार मचा रखा है।
हैरानी की बात यह है कि एक तरफ ओएसडी (चारधाम यात्रा प्रशासन संगठन) प्रजापति नौटियाल ने सरकार को 20 लाख सिलेंडरों की जरूरत की रिपोर्ट भेजी है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर सप्लाई चेन पूरी तरह चरमराई हुई दिख रही है। गोदियाल ने मांग की है कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर होटल संचालकों को निर्बाध आपूर्ति का ठोस भरोसा दें।
| यात्रा धाम | कपाट खुलने की तिथि |
| यमुनोत्री | 19 अप्रैल 2026 |
| गंगोत्री | 19 अप्रैल 2026 |
| केदारनाथ | 22 अप्रैल 2026 |
| बदरीनाथ | 24 अप्रैल 2026 |
यदि जल्द ही कमर्शियल गैस के कोटे में बढ़ोतरी और वितरण में पारदर्शिता नहीं लाई गई, तो चारधाम यात्रा रूट पर खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छू सकते हैं, जिसका सीधा असर देश-विदेश से आने वाले यात्रियों की जेब पर पड़ेगा।









