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देहरादून में गैस का संकट खत्म, सीएम धामी के कड़े तेवर के बाद घर-घर पहुंचने लगा सिलेंडर

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देहरादून। राजधानी देहरादून में पिछले कुछ दिनों से रसोई गैस को लेकर मची अफरातफरी पर अब पूरी तरह लगाम लग गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गैस संकट को लेकर जो कड़े तेवर दिखाए थे, उनका असर अब जमीन पर साफ दिखने लगा है। असल में, प्रशासन ने अब गैस एजेंसियों को दो-टूक कह दिया है कि बहानेबाजी नहीं चलेगी।

देहरादून जिला प्रशासन ने स्पष्ट आदेश जारी किए हैं कि किसी भी उपभोक्ता को अब गैस के लिए गोदामों के चक्कर नहीं काटने होंगे, बल्कि एजेंसियों को हर हाल में होम डिलीवरी सुनिश्चित करनी होगी।

छापेमारी से मचा हड़कंप, 30 टीमें मैदान में

जिलाधिकारी के निर्देश पर पूरे जिले में एक व्यापक चेकिंग अभियान शुरू किया गया है। जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) के.के. अग्रवाल ने बताया कि जिले की 70 गैस एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर नजर रखने के लिए 30 सदस्यीय विशेष टीम बनाई गई है।

यह टीम न केवल गैस गोदामों का औचक निरीक्षण कर रही है, बल्कि यह भी देख रही है कि गैस की बुकिंग के बाद डिलीवरी में देरी क्यों हो रही है। हड़कंप तब मचा जब निरीक्षण के दौरान लापरवाही बरतने वाली कुछ एजेंसियों को मौके पर ही नोटिस थमाया गया।

सप्लाई चेन का नया मॉडल और तेल कंपनियों से तालमेल हैरानी की बात ये है कि देहरादून में गैस की कमी आपूर्ति से ज्यादा ‘मैनेजमेंट’ की वजह से थी। देहरादून जिले में रोजाना करीब 25,000 से ज्यादा सिलेंडरों की खपत होती है, जिसे सुचारू करने के लिए अब प्रशासन सीधे तीन बड़ी तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ तालमेल बिठा रहा है।

जिला पूर्ति विभाग अब ‘क्विक रिस्पांस टीम’ के जरिए क्षेत्रवार मॉनिटरिंग कर रहा है ताकि सप्लाई चेन में कहीं भी अड़ंगा न लगे। साथ ही, घरेलू गैस के कमर्शियल इस्तेमाल पर भी गाज गिराने की तैयारी पूरी है।

वहीं दूसरी तरफ, स्थानीय निवासियों ने भी राहत की सांस ली है। नेहरू कॉलोनी के निवासी कुलदीप रावत का कहना है कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद अब डिलीवरी पटरी पर लौट रही है।

उन्होंने आम जनता से अपील की है कि वे गैस की किल्लत को लेकर पैनिक न करें और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें। प्रशासन ने साफ किया है कि गैस की उपलब्धता अब पूरी तरह नियंत्रण में है और बुकिंग को भी पहले से आसान बना दिया गया है।

अगर कोई गैस एजेंसी होम डिलीवरी के लिए मना करती है या निर्धारित कीमत से अधिक पैसे मांगती है, तो तुरंत जिला प्रशासन के हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज कराएं। गड़बड़ी पाए जाने पर एजेंसी का लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

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