देहरादून। उत्तराखंड में घरेलू गैस सिलेंडरों की किल्लत को लेकर मचे हाहाकार के बीच खाद्य सचिव आनंद स्वरूप ने स्थिति स्पष्ट की है। प्रदेश में वर्तमान में एलपीजी सिलेंडरों का बैकलॉग 2 लाख 68 हजार तक पहुंच गया है। सरकार का दावा है कि यह संकट आपूर्ति की कमी से नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं द्वारा की जा रही पैनिक बुकिंग की वजह से पैदा हुआ है।
खाद्य सचिव ने साफ किया कि राज्य में ईंधन की कोई कमी नहीं है और तेल कंपनियां पूरी क्षमता के साथ सप्लाई दे रही हैं। हालांकि, उपभोक्ताओं में डर के कारण एक साथ बुकिंग करने की होड़ मच गई है, जिससे डिलीवरी सिस्टम पर दबाव बढ़ा है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि जरूरत के अनुसार ही बुकिंग करें ताकि बैकलॉग को जल्द खत्म किया जा सके।
शादी-समारोहों के सीजन को देखते हुए प्रशासन ने बड़ी राहत देने की कोशिश की है। गैस एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे विवाह कार्यों के लिए तत्काल ‘अस्थाई गैस कनेक्शन’ जारी करें। हालांकि, इस सुविधा के तहत एक समारोह के लिए अधिकतम दो कमर्शियल सिलेंडर ही उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे शादियों में होने वाली अवैध रिफिलिंग और कालाबाजारी पर लगाम लगने की उम्मीद है।
इधर, खाड़ी देशों और मध्य पूर्व एशिया के युद्धग्रस्त या संकटग्रस्त इलाकों में फंसे उत्तराखंड के नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सरकार अलर्ट मोड पर है। ईरान, इराक, कुवैत, ओमान और इजराइल जैसे देशों में मौजूद प्रवासियों की मदद के लिए विशेष सचिव (गृह) निवेदिता कुकरेती को नोडल अधिकारी बनाया गया है। वह विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावासों के साथ समन्वय कर प्रवासियों की वापसी और सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी।
मदद के लिए सरकार ने आधिकारिक मोबाइल नंबर 9411112792 और ईमेल आईडी dgc-police-ua@nic.in जारी की है। पीड़ित परिवार इन माध्यमों से नोडल अधिकारी से सीधा संपर्क साध सकते हैं।
पेट्रोल-डीजल की स्थिति पर सचिव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के सभी पंपों पर पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। इसके साथ ही सरकार वैकल्पिक ऊर्जा के तौर पर पिरुल पैलेट के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है। शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अप्रैल अंत तक पीएनजी (PNG) कनेक्शनों की संख्या 36,300 से बढ़ाकर 1.5 लाख करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।
देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में पीएनजी सप्लाई का विस्तार किया जा रहा है। इसके अलावा कोटद्वार, टिहरी और नैनीताल जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछाने के काम में तेजी लाने के लिए जिला स्तर पर ही अनुमति देने के अधिकार सौंप दिए गए हैं। औद्योगिक इकाइयों को भी प्राथमिकता के आधार पर क्लस्टर में कनेक्शन दिए जा रहे हैं।









