Gold Investment : अगर आप आने वाले समय के लिए सोना या चांदी में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो यह समझना जरूरी है कि किस रूप में निवेश करना फायदेमंद रहेगा।
ज्वेलरी, कॉइन, बार या ETF (Exchange Traded Fund)। इसके ऊपर हम आपको हमारे एक्सपर्ट केडिया कैपिटल के फाउंडर अजय केडिया विस्तार से बता रहे हैं कि सोने-चांदी के गिरते दामों के बीच आपके लिए इन्वेस्टमेंट और उपयोग के लिए सोना-चांदी खरीदने में क्या बेहतर विकल्प रहेगा।
अगर उपयोग के लिए खरीद रहे हैं
अगर आपके घर में आने वाले 2-3 साल में शादी या कोई बड़ा समारोह है, तो अभी से ज्वेलरी के रूप में सोना खरीदना बेहतर रहेगा। ऐसा करने से आप आने वाले समय में बढ़ते मेकिंग चार्ज और डिज़ाइन बदलाव के खर्च से बच सकते हैं। हालांकि, ज्वेलरी में निवेश का नुकसान यह है कि इसे बेचते वक्त मेकिंग चार्ज वापस नहीं मिलता, जिससे असली निवेश पर रिटर्न घट जाता है। Gold Investment के मामले में यह एक आम चुनौती है, खासकर जब Gold ETFs (Exchange Traded Fund) जैसे विकल्प आसानी से उपलब्ध हैं।
अगर निवेश के लिए खरीद रहे हैं
अगर आपको सोना या चांदी सिर्फ निवेश के लिए चाहिए और तुरंत इस्तेमाल की जरूरत नहीं है, तो कॉइन या बार (coins & bars) लेना समझदारी होगी। इन पर मेकिंग चार्ज कम लगता है और जरूरत पड़ने पर इन्हें आसानी से बेचा या एक्सचेंज किया जा सकता है। इसके अलावा, Gold ETFs या Sovereign Gold Bonds में निवेश करना भी बेहतर विकल्प है, क्योंकि इसमें न तो स्टोरेज की दिक्कत होती है और न ही मेकिंग चार्ज का नुकसान।
Silver Investment के लिए भी कॉइन और बार एक स्मार्ट चॉइस साबित हो सकते हैं, जबकि HUID (Hallmark Unique Identification) सिस्टम जैसी सरकारी पहल पारदर्शिता ला रही है।
पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में सरकार का कदम
भारत सरकार ने हाल ही में HSN कोड और HUID सिस्टम लागू किया है, जिससे सोने-चांदी की ज्वेलरी की सोर्स ट्रैकिंग आसान हो गई है। HUID (Hallmark Unique Identification) के जरिए अब हर ज्वेलरी आइटम की पहचान संभव है। यानी आपको पता रहेगा कि यह कहां बनी है और कितनी शुद्ध है। इससे मार्केट में पारदर्शिता और भरोसा दोनों बढ़े हैं।
Gold Investment को और सुरक्षित बनाने के लिए HSN कोड जैसी व्यवस्था वाकई गेम-चेंजर है। इसके अलावा, सोने पर अभी 3% GST लागू है, जो सरकार द्वारा तय की गई टैक्स श्रेणी में आता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अगर यह टैक्स थोड़ा घटे, तो गोल्ड खरीदारी और तेज़ हो सकती है।
सोना-चांदी की कीमतों पर नजर
अजय केडिया के मुताबिक, सोने में हाल ही में करीब 8-8.5% की गिरावट देखी गई है। आने वाले समय में इसमें 10-12% तक की और गिरावट संभव है। पिछले आंकड़ों के अनुसार, सोना अगर ₹1,24,000 के आसपास आता है, तो यह खरीदारी का अच्छा मौका हो सकता है। वहीं, चांदी में 40,000 रुपये प्रति किलो तक की गिरावट की संभावना जताई जा रही है।
ऐसे में निवेशक अगर धैर्य रखें, तो आने वाले महीनों में बेहतर दाम पर खरीदारी का मौका मिल सकता है। Sovereign Gold Bonds जैसे ऑप्शन के साथ Gold ETFs (Exchange Traded Fund) मिलाकर Silver Investment को बैलेंस करना सही रणनीति होगी।









