Govardhan Puja Muhurat : गोवर्धन पूजा, जो मुख्य रूप से उत्तर भारत में बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है, कृष्ण जन्माष्टमी के अगले दिन होती है। इस वर्ष यानी 2025 में गोवर्धन पूजा 2 नवंबर को है।
इसे अन्नकूट पर्व भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन भगवान कृष्ण के सम्मान में गोवर्धन पर्वत की पूजा और अन्नकूट का भव्य आयोजन किया जाता है।
पूजा का महत्व
गोवर्धन पूजा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बेहद गहरा है। ऐसा माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठाकर अपनी प्रजा को बारिश के प्रकोप से बचाया था।
इसलिए इस दिन धन, समृद्धि और सुरक्षा के लिए गोवर्धन और गौ-माता की पूजा की जाती है। इस दिन का महत्व केवल धार्मिक नहीं है, बल्कि यह प्रकृति की सुरक्षा और किसानों के लिए आभार व्यक्त करने का पर्व भी माना जाता है।
अन्नकूट या गोवर्धन पूजा में भोजन का भंडारा लगाया जाता है, जिसमें दाल, चावल, मिठाई और अन्य व्यंजन भगवान को अर्पित किए जाते हैं।
पूजा मुहूर्त और विधि
गोवर्धन पूजा के लिए सुबह का समय शुभ माना जाता है। आम तौर पर पूजा सूर्योदय के समय या सुबह 7:00 से 10:00 बजे के बीच की जाती है। पूजा विधि सरल है:
गोवर्धन पर्वत की मिट्टी या छोटा मॉडल तैयार करें। इसे फूल, कचरी और चावल से सजाएं।
गाय की पूजा और उसका आशीर्वाद लें। अन्नकूट बनाकर भगवान कृष्ण और गोवर्धन पर्वत को अर्पित करें।
पूजा के बाद परिवार और पड़ोसियों में प्रसाद बांटें।
अन्नकूट: भव्य भोजन का पर्व
अन्नकूट का मतलब है “भोजन का पर्वत।” इस दिन भक्त अन्न और मिठाइयों की विशाल श्रृंखला बनाते हैं। यह न केवल भगवान को भोग लगाने का अवसर है, बल्कि समाज में प्रेम, साझा करने और भाईचारे की भावना को भी बढ़ाता है।
गोवर्धन पूजा में ये भूलें मत करें
गोवर्धन पर्वत या मिट्टी का मॉडल बनाने में साफ-सफाई और शुद्धता का ध्यान रखें।
पूजा में धूम्रपान या शराब का सेवन वर्जित है। सामान्य व्यस्तताओं में पूजा को नजरअंदाज न करें।
गोवर्धन पूजा सिर्फ एक धार्मिक रिवाज नहीं, बल्कि यह संस्कृति, प्रकृति और मानवता के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है।
इस दिन की पूजा और अन्नकूट उत्सव समृद्धि, सौभाग्य और खुशहाली लेकर आता है। इसलिए सभी घरों में इसे श्रद्धा और प्रेमपूर्वक मनाना चाहिए।









