देहरादून। उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं को अब दफ्तरों के चक्कर काटने और जूनियर इंजीनियरों की मिन्नतें करने से निजात मिल सकती है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) ने ऊर्जा निगम की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के लिए सीधे ‘सिर’ पर वार करने की तैयारी कर ली है। आयोग ने साफ कर दिया है कि सेवाओं में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं होगी।
अब तक की व्यवस्था में बिजली कनेक्शन में देरी या तकनीकी खामियों के मामलों में निचले स्तर के इंजीनियरों को नोटिस थमाकर खानापूर्ति कर ली जाती थी। ऊर्जा निगम पर जुर्माना तो लगता था, लेकिन बड़े अधिकारी जवाबदेही से बच निकलते थे। आयोग की नई गाइडलाइन ने इस ढर्रे को पूरी तरह बदल दिया है। अब उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) से लेकर तमाम बड़े निदेशकों को कटघरे में खड़ा किया जाएगा।
आयोग के कड़े रुख के बाद अब एमडी, निदेशक (ऑपरेशन), निदेशक (प्रोजेक्ट), निदेशक (वित्त) और निदेशक (मानव संसाधन) सीधे कार्रवाई के दायरे में आ गए हैं। शिकायतों का समय पर निस्तारण न होने या निर्देशों की अवहेलना पर आयोग इन अधिकारियों को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए तलब करेगा। अधिशासी निदेशक (HR) को भी इस नई जवाबदेही प्रणाली का हिस्सा बनाया गया है।
आयोग का मानना है कि जब तक प्रबंधन के शीर्ष स्तर पर डर नहीं होगा, तब तक जमीनी स्तर पर सुधार संभव नहीं है। नए कनेक्शन के आवेदन पेंडिंग रहने या घोषित कटौती से जुड़ी समस्याओं पर अब टॉप मैनेजमेंट को जवाब देना होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम राज्य में ‘ईज ऑफ लिविंग’ को बढ़ावा देगा। इससे न केवल सिस्टम में पारदर्शिता आएगी, बल्कि अधिकारियों की कार्यक्षमता में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।









