Karwa Chauth Puja : हिंदू धर्म में करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद पवित्र और शुभ माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव की दीर्घायु के लिए, वहीं द्रौपदी ने पांडवों के कल्याण के लिए करवा चौथ का व्रत रखा था। तभी से यह परंपरा चली आ रही है और आज भी सुहागिनें इसे पूरे श्रद्धा भाव से निभाती हैं।
करवा चौथ का शुभ समय और योग
इस वर्ष करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर रखा जाएगा। पंडितों के अनुसार इस बार व्रत के दिन सिद्धि योग और व्यतिपात योग का संयोग बन रहा है।
सिद्धि योग को अत्यंत शुभ माना गया है, लेकिन व्यतिपात योग अशुभ फल देने वाला होता है। इसलिए इस साल महिलाएं पूजा का संपूर्ण विधान 10 अक्टूबर की शाम 05:42 बजे से पहले कर लें। इसके बाद केवल चंद्रमा को अर्घ्य देने और जल ग्रहण करने की परंपरा निभाएं।
कब से कब तक रहेगी करवा चौथ तिथि
काशी के प्रसिद्ध ऋषिकेश और महावीर पंचांग के अनुसार, करवा चौथ की चतुर्थी तिथि 9 अक्टूबर की रात 10:55 बजे से शुरू होकर 10 अक्टूबर शाम 7:39 बजे तक रहेगी।
इस दिन चंद्रोदय रात 8:03 बजे होगा। नक्षत्र की बात करें तो कृत्तिका नक्षत्र 9 अक्टूबर की रात 8:03 बजे से लेकर 10 अक्टूबर शाम 5:32 बजे तक रहेगा।
इसके बाद रोहिणी नक्षत्र शुरू होगा, जो 11 अक्टूबर दोपहर 3:27 बजे तक रहेगा। ज्योतिष के अनुसार, रोहिणी नक्षत्र में चंद्रमा का उदय होना शुभ माना जाता है।
कैसे करें करवा चौथ व्रत और पूजा
सुहागिन महिलाएं करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करती हैं। सरगी में सास द्वारा दी गई मिठाइयां, फल, और पारंपरिक व्यंजन शामिल होते हैं। इसके बाद महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं यानी न तो जल ग्रहण करती हैं और न ही भोजन।
शाम के समय महिलाएं सजधज कर बैठती हैं, शृंगार करती हैं और चौथ माता, गणेशजी व करवा माता की पूजा करती हैं।
पूजा के बाद महिलाएं कथा सुनती हैं और रात में जब चांद निकलता है, तो वे चलनी से चंद्र दर्शन करती हैं और अपने पति के हाथ से जल ग्रहण करके व्रत पूरा करती हैं।
व्यतिपात योग से बचने का उपाय
इस बार का व्यतिपात योग व्रत के प्रभाव को प्रभावित कर सकता है, इसलिए ज्योतिषाचार्य सलाह देते हैं कि महिलाएं 10 अक्टूबर की शाम 5:42 बजे से पहले ही पूजा का संपूर्ण विधान पूरा कर लें।
ऐसा करने से व्यतिपात योग का अशुभ प्रभाव कम होगा और व्रत का पुण्य फल प्राप्त होगा।
चंद्रोदय के समय केवल चंद्र पूजन और अर्घ्यदान ही करें। मान्यता है कि करवा माता कठिन समय में भी अपने भक्तों के सुहाग की रक्षा करती हैं।
व्रत का आध्यात्मिक संदेश
करवा चौथ केवल एक धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि यह विश्वास, प्रेम और त्याग का प्रतीक है। इस दिन का उपवास स्त्री की आस्था और समर्पण का प्रमाण होता है।
कहा जाता है कि इस दिन का व्रत पति-पत्नी के रिश्ते को और अधिक मजबूत बनाता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
इस वर्ष करवा चौथ का व्रत कुछ विशेष और थोड़ा चुनौतीपूर्ण योग में आ रहा है। इसलिए महिलाएं पूजा का शुभ समय ध्यान में रखते हुए व्रत करें और व्यतिपात योग से पहले सभी धार्मिक विधान पूरे कर लें।
विश्वास और भक्ति के साथ किया गया व्रत हमेशा शुभ फल देता है।









