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Benami Property : बेनामी संपत्ति रखने वालों पर सरकार की बड़ी सख्ती, जानें क्या है सजा

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Benami Property : जब हम ‘बेनामी संपत्ति’ (Benami Property) की बात करते हैं, तो इसका मतलब होता है ऐसी संपत्ति जो किसी असली मालिक के नाम पर नहीं, बल्कि किसी और के नाम पर हो। यानी असली खरीददार या मालिक छिपा होता है और दस्तावेजों में जो नाम लिखा होता है, वह केवल दिखावे के लिए होता है।

इस तरह की बेनामी संपत्ति (Benami Property) खरीदने या रखने का मतलब है कि असली मालिक खुद को छुपा रहा है। यह काम अक्सर टैक्स बचाने, संपत्ति छिपाने या सरकारी नियमों को तोड़ने के लिए किया जाता है।

बेनामी संपत्ति खरीदना क्यों खतरनाक है?

बेनामी संपत्ति (Benami Property) का बाजार काफी जटिल और जोखिम भरा है। भारत में ऐसे लेन-देन गैरकानूनी हैं और इसके लिए सख्त कानून बने हुए हैं। अगर किसी बेनामी संपत्ति (Benami Property) को पकड़ लिया जाता है, तो न सिर्फ उसकी संपत्ति जब्त हो सकती है बल्कि जेल की सजा भी हो सकती है। भारत सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है और 2016 में बेनामी संपत्ति (Benami Property) के खिलाफ कानून को और सख्त कर दिया है। अब बेनामी संपत्ति (Benami Property) रखने पर सात साल तक की जेल और भारी जुर्माना भी लग सकता है।

इसलिए बेनामी संपत्ति (Benami Property) खरीदना सिर्फ एक कागजी प्रक्रिया नहीं, बल्कि आपके पूरे जीवन को प्रभावित करने वाला खतरा है। आपकी बेनामी संपत्ति (Benami Property) छिन सकती है, आपकी छवि खराब हो सकती है और मानसिक तनाव भी हो सकता है।

बेनामी संपत्ति कैसे बनती है?

अक्सर लोग टैक्स या कानून की सीमाओं से बचने के लिए बेनामी संपत्ति (Benami Property) खरीदते हैं। उदाहरण के लिए कोई अमीर व्यक्ति अपनी बेनामी संपत्ति (Benami Property) को अपने किसी घरेलू कर्मचारी या परिचित के नाम पर दर्ज करवा देता है ताकि उसकी असली संपत्ति छुप जाए। यानी पैसा कोई और देता है, कागज पर कोई और नाम होता है। लेकिन यह तरीका कानून के लिए अपराध है।

भारत में बेनामी संपत्ति का कानून क्या कहता है?

भारत में 1988 में पहली बार बेनामी संपत्ति (Benami Property) रोकने वाला कानून बना था, लेकिन वह उतना प्रभावी नहीं था। 2016 में इसे और मजबूत किया गया। इस कानून के तहत सरकार के पास अधिकार है कि वह बेनामी संपत्ति (Benami Property) जब्त कर सकती है और दोषी को जेल भेज सकती है।

साथ ही अगर कोई बेनामी संपत्ति (Benami Property) साबित हो जाती है, तो कोर्ट उसके मालिकाना हक को नहीं सुनती। फिर भी, कानून में कुछ छूट भी दी गई हैं, जैसे जीवनसाथी या बच्चों के नाम पर खरीदी गई बेनामी संपत्ति (Benami Property) या विरासत में मिली संपत्ति बेनामी नहीं मानी जाती। जब तक कि इनके कागजात सही और स्पष्ट हों।

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