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केदारनाथ-बदरीनाथ में लैंडिंग होगी अब और सुरक्षित, यात्रा से पहले शुरू होगा नया सुरक्षा सिस्टम

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देहरादून। उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा (Chardham Yatra 2026) को लेकर सरकार ने सुरक्षा के मोर्चे पर बड़ा फैसला लिया है। केदारनाथ और बदरीनाथ जैसे दुर्गम हिमालयी धामों में उड़ानों को नियंत्रित करने के लिए अस्थायी एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) सिस्टम स्थापित किया जाएगा।

दरअसल, सरकार इन क्षेत्रों में स्थायी एटीसी टावर बनाना चाहती थी, लेकिन ऊंचे पहाड़ों पर उपयुक्त भूमि का चयन न हो पाने के कारण इस योजना में देरी हो रही है। जमीन मिलने और उसके हस्तांतरण की कानूनी प्रक्रिया लंबी होने के कारण शासन ने यात्रियों की जान जोखिम में न डालते हुए प्री-फेब स्ट्रक्चर के जरिए अस्थायी व्यवस्था का विकल्प चुना है।

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यह कदम पिछले साल के कड़वे अनुभवों के बाद उठाया गया है। केदारनाथ और उत्तरकाशी में हुए दो अलग-अलग हेलीकॉप्टर हादसों ने पूरे देश को झकझोर दिया था, जिसमें कुल 13 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। उन हादसों के बाद यह महसूस किया गया कि पल-पल बदलते मौसम और संकरी घाटियों में उड़ानों की सटीक मॉनिटरिंग के लिए एटीसी अनिवार्य है।

उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) के सीईओ आशीष चौहान ने स्पष्ट किया है कि यात्रा शुरू होने की तिथि से पहले ही इन एटीसी प्रणालियों को चालू कर दिया जाएगा। वर्तमान में उत्तराखंड के पास 12 हेलीपोर्ट और 118 हेलीपैड का विशाल नेटवर्क है, जिसे अब तकनीक से लैस किया जा रहा है। विशेष रूप से हेमकुंड साहिब और गंगोत्री जैसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों के लिए भी विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार किए जा रहे हैं।

दूसरी ओर, केदारनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए आज का दिन काफी अहम है। यूकाडा आज हेली सेवाओं के नए किराए की सूची जारी कर सकता है। गुप्तकाशी, सिरसी और फाटा के नौ हेलीपैड से उड़ान भरने वाली कंपनियों के लिए टेंडर प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है।

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किराया तय होते ही आईआरसीटीसी (IRCTC) की आधिकारिक वेबसाइट पर बुकिंग स्लॉट खोल दिए जाएंगे। इस बार प्रशासन ने सख्त हिदायत दी है कि टिकटों की कालाबाजारी रोकने के लिए केवल अधिकृत पोर्टल का ही इस्तेमाल किया जाए। हेली कंपनियों को जल्द ही उनके आवंटित हेलीपैड की जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी, ताकि वे यात्रा सीजन के लिए अपनी तैयारियां पुख्ता कर सकें।

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