देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में दलबदल के खेल के बीच बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। भट्ट ने दो टूक कहा कि जिन लोगों को बीजेपी ने अनुशासनहीनता, भ्रष्टाचार और अनैतिक आचरण के चलते कूड़े के भाव बाहर फेंक दिया था, कांग्रेस उन्हें ‘सिलेक्ट’ करके अपनी पीठ थपथपा रही है।
महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की आपत्तियों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि गलती उनके शब्दों में नहीं, बल्कि कांग्रेसियों की उस ‘द्विअर्थी सोच’ में है जो वे अपने ही साथियों के प्रति रखते हैं। भट्ट ने रामायण की चौपाई का सहारा लेते हुए कहा, “जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी।” यानी कांग्रेस नेताओं को हर बात में अपना ही अक्स नजर आता है।
पार्टी मुख्यालय में मीडिया से अनौपचारिक बातचीत के दौरान भट्ट ने साफ किया कि हाल ही में दिल्ली में कांग्रेस का हाथ थामने वाले नेता असल में ‘अंधे के हाथ लगी बटेर’ जैसे हैं। इनमें पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, नारायण पाल और भीमलाल आर्य जैसे नाम शामिल हैं, जिन्हें बीजेपी काफी पहले ही बाहर का रास्ता दिखा चुकी है। भट्ट ने याद दिलाया कि ये लोग जनता की अदालत में भी नकारे जा चुके हैं और चुनाव हार चुके हैं।
सियासी गलियारों में चर्चा इस बात की भी है कि इन नई भर्तियों से कांग्रेस के पुराने दिग्गज बुरी तरह भड़के हुए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने तो बाकायदा ‘मौन व्रत’ धारण कर लिया है और राजनीति से ‘अर्जित अवकाश’ पर जाने का ऐलान कर दिया है। भट्ट ने इसी पर चुटकी लेते हुए कहा कि आने वालों से ज्यादा तो वहां जाने वालों की कतार लंबी है। कोई इस्तीफा दे रहा है तो कोई कोप भवन में जा बैठा है।
उन्होंने आगे जोड़ा कि कांग्रेस को दूसरों की लिस्ट देखने से पहले अपने बचे-खुचे स्वाभिमानी नेताओं की लिस्ट संभालनी चाहिए। बीजेपी नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अनुशासन और नैतिकता से कभी समझौता नहीं करेगी, चाहे इसके लिए कोई भी कीमत चुकानी पड़े। उत्तराखंड में 2027 के चुनावी रण से पहले महेंद्र भट्ट का यह बयान कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी को और हवा दे सकता है।









