नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घुसपैठ को देश के लिए एक गंभीर खतरा करार दिया। उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए सख्त कदम उठाने का ऐलान किया। इस बयान पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने तीखी प्रतिक्रिया दी और पीएम पर वादों की बौछार करने, लेकिन हकीकत में कम उपलब्धियां दिखाने का आरोप लगाया।
पीएम का भाषण, टीएमसी का तंज
स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कई मुद्दों पर खुलकर बात की। लेकिन उनके बयानों पर टीएमसी ने तीखा हमला बोला। पार्टी का कहना है कि पीएम ने घुसपैठियों को देश का नया दुश्मन बताकर एक बार फिर पुरानी सरकारों को निशाना बनाया। टीएमसी की राज्यसभा उपनेता सागरिका घोष ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “हर बार की तरह इस बार भी पीएम मोदी ने अपने भाषण में एक नया दुश्मन चुना।
पहले आंदोलनजीवी, अब घुसपैठिए। बड़े-बड़े वादे तो किए, लेकिन पिछले 11 साल की उपलब्धियां गिनाने में पीएम चूक गए।” उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर पीएम कब अपने शासन के रिकॉर्ड पर खुलकर बोलेंगे?
हाई पावर डेमोग्राफी मिशन का ऐलान
सख्त कदम उठाने की तैयारी: पीएम मोदी ने घुसपैठ की समस्या से निपटने के लिए एक बड़े कदम का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने देशवासियों के कल्याण के लिए ‘हाई पावर्ड डेमोग्राफी मिशन’ शुरू करने का फैसला लिया है।
पीएम ने चिंता जताई कि घुसपैठिए देश की डेमोग्राफी को बदल रहे हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा, “जब सीमावर्ती इलाकों में जनसांख्यिकी बदलाव होता है, तो यह देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन जाता है।”
घुसपैठिए: देश के लिए नया खतरा
“बहन-बेटियों और रोजगार पर संकट”: पीएम मोदी ने अपने भाषण में घुसपैठ को एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा, “षडयंत्र के तहत देश की जनसांख्यिकी को बदला जा रहा है। घुसपैठिए हमारे नौजवानों की रोजी-रोटी छीन रहे हैं। ये हमारी बहन-बेटियों को निशाना बना रहे हैं। आदिवासियों की जमीन पर कब्जा कर रहे हैं।” पीएम ने साफ शब्दों में कहा कि देश इस खतरे को और बर्दाश्त नहीं करेगा।
उन्होंने देशवासियों को इस गंभीर चुनौती से आगाह करते हुए कहा कि यह समस्या अब केवल सीमावर्ती क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए खतरा बन चुकी है। पीएम के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।









