New Labour Codes : अगर आपकी सालाना CTC (Cost To Company) ₹7 लाख से ₹15 लाख के बीच है, तो ये खबर आपके लिए अलार्म की तरह है! 21 नवंबर 2025 को केंद्र सरकार ने नए लेबर कोड (New Labour Codes) को नोटिफाई कर दिया है और इससे आपकी सैलरी स्ट्रक्चर (Salary Structure) में जबरदस्त उलट-फेर होने वाला है।
अच्छी बात ये है कि आपकी ग्रेच्युटी (Gratuity) और PF (Provident Fund) खाता फूलने वाला है, लेकिन बुरी बात ये कि हर महीने जो इन-हैंड सैलरी (Take-Home Salary) आती है, वो हजारों रुपये तक कम हो सकती है।
आखिर नया नियम क्या कहता है?
नए लेबर कोड (New Labour Codes) में सबसे बड़ा बदलाव “मजदूरी” (Wages) की परिभाषा में हुआ है। अब बेसिक पे (Basic Pay) + महंगाई भत्ता (DA) + रिटेनिंग अलाउंस मिलाकर कम से कम 50% हिस्सा “मजदूरी” (Wages) का होना अनिवार्य है।
पहले कई कंपनियां बेसिक सैलरी (Basic Salary) को 30-40% ही रखती थीं और बाकी 60-70% अलाउंस (Allowances) में डाल देती थीं ताकि PF (Provident Fund) और ग्रेच्युटी (Gratuity) पर कम कटौती हो। अब वो ट्रिक नहीं चलेगी।
अगर अलाउंस (Allowances) 50% से ज्यादा हुए तो बची हुई राशि को भी अपने आप “मजदूरी” (Wages) में जोड़ दिया जाएगा। नतीजा? PF (Provident Fund), ग्रेच्युटी (Gratuity) और ESI पर ज्यादा योगदान देना पड़ेगा – जो आपकी CTC (Cost To Company) में से ही कटेगा। मतलब टेक-होम सैलरी (Take-Home Salary) घटेगी।
उदाहरण से समझिए असली नुकसान
मान लीजिए आपकी CTC (Cost To Company) ₹7 लाख है:
विवरण | पुराना स्ट्रक्चर (40% Basic) | नया स्ट्रक्चर (50% Basic) |
|---|---|---|
बेसिक सैलरी | ₹2,80,000 | ₹3,50,000 |
PF योगदान (12%) | ₹33,600 | ₹42,000 |
ग्रेच्युटी (4.81%) | ₹13,468 | ₹16,835 |
सालाना टेक-होम | ₹6,52,932 | ₹6,41,165 |
यानी ₹7 लाख CTC (Cost To Company) पर भी सालाना ₹11,767 तक कम आएंगे जेब में! ₹15 लाख CTC (Cost To Company) वालों का नुकसान और भी ज्यादा होगा।
अच्छी खबर – रिटायरमेंट में मोटा फायदा
हाँ, महीने में थोड़ा कम आएगा लेकिन रिटायरमेंट के समय मुस्कुराहट अपने आप आ जाएगी। क्योंकि ग्रेच्युटी (Gratuity) और PF (Provident Fund) अब ज्यादा बेस पर कैलकुलेट होंगे।
डेलॉयट के हिसाब से ₹10 लाख CTC (Cost To Company) पर 7 साल सर्विस वाले कर्मचारी की ग्रेच्युटी (Gratuity):
- पहले → ₹1.34 लाख
- अब → ₹2.41 लाख (लगभग 80% ज्यादा!)
कंपनियों को करना होगा तुरंत ऐक्शन
कंपनियों का कुल खर्च (CTC) नहीं बढ़ेगा, बस सैलरी स्ट्रक्चर (Salary Structure) को फिर से डिजाइन करना पड़ेगा। अलाउंस (Allowances) को 50% से नीचे रखना होगा वरना एक्स्ट्रा राशि अपने आप “मजदूरी” (Wages) में जुड़ जाएगी। एक्सपर्ट्स बता रहे हैं कि ज्यादातर प्राइवेट कंपनियों को अभी से अपने पे-रोल में बदलाव शुरू करने होंगे।









