New Labour Codes : जब भारत में नया लेबर कोड (New Labour Codes) पूरी तरह लागू हो जाएगा, तो इसका असर सिर्फ कंपनी के HR डिपार्टमेंट या बैलेंस शीट तक सीमित नहीं रहेगा। सीधा झटका लगेगा लाखों सैलरिड लोगों के बैंक अकाउंट में।
खासकर जिन कर्मचारियों का बेसिक पे (Basic Pay) अभी उनके कुल CTC का आधे से भी कम है, उनके लिए यह बदलाव महीने की सैलरी को सीधे कम कर देगा – भले ही कुल पैकेज (CTC) वही रहे।
अभी तक कंपनियां चलाती थीं ये खेल
पिछले कई सालों से ज्यादातर कंपनियां बेसिक सैलरी को CTC का सिर्फ 25-40% ही रखती थीं। ऐसा करने से स्पेशल अलाउंस (Special Allowance) का हिस्सा ज्यादा हो जाता था, जिसकी वजह से कर्मचारी के हाथ में हर महीने ज्यादा पैसे आते थे।
लेकिन नया लेबर कोड (New Labour Codes) इस पूरी खेल को बदलने जा रहा है। अब कम से कम 50% CTC को “वेजेस” (Wages) में गिना जाना जरूरी होगा।
“अब ज्यादातर कंपनियां बेसिक सैलरी कम रखकर PF और ग्रेच्युटी का खर्चा कंट्रोल करती हैं। नया कोड वेजेस की परिभाषा को सख्त कर रहा है और कम से कम आधा CTC वेजेस में आना ही होगा,” ग्लोबल HR कंपनी Gi Group Holding के डायरेक्टर फाइनेंस कुलजीत सिंह ने बताया।
PF और ग्रेच्युटी में होगा भारी इजाफा
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर EPF (Employees’ Provident Fund) और ग्रेच्युटी पर पड़ेगा। जितना ज्यादा हिस्सा वेजेस में आएगा, उतनी ही ज्यादा रकम पर 12% PF कटेगा – कर्मचारी का भी और कंपनी का भी।
टीमलीज सर्विसेज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बालासुब्रमण्यन ए कहते हैं, “अब CTC का 50% हिस्सा EPF (Employees’ Provident Fund) कैलकुलेशन में आएगा। अगर आपका CTC नहीं बढ़ा, तो PF कटौती बढ़ेगी और टेक-होम सैलरी थोड़ी कम हो जाएगी।”
हालांकि जिन लोगों का अभी मिनिमम ₹1,800 महीना PF कट रहा है, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
टेक-होम सैलरी पर सीधा असर
नए नियम में वेजेस में बेसिक पे, डियरनेस अलाउंस और ज्यादातर अलाउंस शामिल होंगे। HRA, कन्वेयंस अलाउंस और कमीशन जैसे कुछ अलाउंस को छूट मिलेगी।
नतीजा? EPF (Employees’ Provident Fund) और ग्रेच्युटी के लिए आधार राशि बढ़ जाएगी। कर्मचारी का हर महीने हाथ में आने वाला पैसा कम होगा, लेकिन लॉन्ग टर्म में रिटायरमेंट फंड (Retirement Corpus) और ग्रेच्युटी काफी मजबूत हो जाएगी।
कुलजीत सिंह कहते हैं, “कंपनियों को सैलरी स्ट्रक्चर दोबारा बनाना पड़ेगा। वेरिएबल पे और बोनस को लेकर भी नए नियम हैं।”
ग्रेच्युटी में सबसे बड़ा बदलाव
अब फिक्स्ड टर्म कॉन्ट्रैक्ट वाले कर्मचारियों को भी सिर्फ 1 साल नौकरी करने के बाद ग्रेच्युटी मिलेगी – पहले 5 साल लगते थे।
सिरिल अमरचंद मंगलदास की पार्टनर रश्मि प्रदीप बताती हैं, “कई कंपनियां शॉर्ट टर्म और प्रोजेक्ट बेस्ड स्टाफ रखती हैं। अब उन्हें पहले से ग्रेच्युटी देनी पड़ेगी – खर्चा बहुत बढ़ेगा।”
आखिर कर्मचारी के लिए फायदा है या नुकसान?
छोटे स्तर पर देखें तो टेक-होम सैलरी जरूर कम होगी – खासकर जिनका बेसिक पे अभी बहुत कम है।
लेकिन बड़ी तस्वीर देखें तो EPF (Employees’ Provident Fund) का कॉर्पस बढ़ेगा, ग्रेच्युटी ज्यादा मिलेगी और रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा कहीं ज्यादा मजबूत होगी।
तो सवाल ये है – अभी थोड़ा कम हाथ में लेना पसंद करेंगे या रिटायरमेंट में मालामाल होना चाहते हैं?









