देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी में एलपीजी गैस की कालाबाजारी के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए जिला प्रशासन ने ऑपरेशन शुरू कर दिया है। जिलाधिकारी सविन बंसल के सख्त निर्देशों के बाद अब कोई भी गैस एजेंसी मनमाने ढंग से सिलेंडरों की सप्लाई नहीं कर पाएगी। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि गैस की डिलीवरी केवल उन्हीं लोडर वाहनों से होगी जो कंपनी के साथ अधिकृत रूप से अनुबंधित हैं।
एसडीएम सदर हरी गिरी के नेतृत्व में चली इस विशेष जांच मुहिम में क्षेत्रीय खाद्य गैस अधिकारी अजय पाल सिंह और पूर्ति लिपिक होशियार सिंह की टीम ने रिंग रोड क्षेत्र में छापेमारी की। इस दौरान भारत गैस के कई डिलीवरी मैन बिना किसी अनुबंध के मोटरसाइकिल पर सिलेंडर ढोते पाए गए। अधिकारियों के मुताबिक, बिना रिकॉर्ड वाले इन निजी वाहनों के इस्तेमाल से गैस की कालाबाजारी और अवैध रिफिलिंग की आशंका प्रबल हो जाती है।
जांच टीम ने इसके बाद अरविंद गैस एजेंसी और आधुनिक गैस एजेंसी के गोदामों पर धावा बोला। यहां भी नियमों की धज्जियां उड़ती मिलीं, जहां बाइक और साइकिल जैसे छोटे वाहनों का उपयोग व्यावसायिक लाभ के लिए किया जा रहा था। प्रशासन ने दोनों एजेंसियों को फटकार लगाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में अनुबंधित वाहनों के अलावा किसी अन्य साधन से सप्लाई हुई, तो उनके खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
सप्लाई चेन को पारदर्शी बनाने के लिए जिले में क्षेत्रवार क्विक रिस्पांस टीमें (QRT) तैनात की गई हैं। ये टीमें न केवल स्टॉक की निगरानी कर रही हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रही हैं कि उपभोक्ताओं को समय पर होम डिलीवरी मिले। जिला प्रशासन के कंट्रोल रूम और व्हाट्सएप नंबर 7534826066 पर अब तक गैस आपूर्ति से जुड़ी 19 शिकायतें दर्ज की गई हैं, जिनका मौके पर ही निस्तारण किया जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में जिले के 17,959 घरेलू और 407 व्यावसायिक उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर की आपूर्ति की गई है। वर्तमान में देहरादून में 36,534 घरेलू और 1,671 व्यावसायिक सिलेंडरों का बफर स्टॉक मौजूद है। प्रशासन ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे केवल अधिकृत वाहनों से ही गैस लें ताकि सुरक्षा और शुद्धता सुनिश्चित की जा सके।









