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Paapankusha Ekadashi Puja Muhurat : सर्वार्थ सिद्धि योग के दिन पापांकुशा एकादशी, जानें सही पूजा समय और कथा

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Paapankusha Ekadashi Puja Muhurat : पापांकुशा एकादशी का व्रत इस साल 3 अक्टूबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन विशेष योग बन रहे हैं – रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग।

इस व्रत को करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति संभव होती है। व्रत के दौरान भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और पापांकुशा एकादशी की कथा का श्रवण करते हैं।

इस वर्ष पापांकुशा एकादशी का पूजा मुहूर्त सुबह 06:15 बजे से 10:41 बजे तक है। यह व्रत आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आता है।

आइए जानते हैं पापांकुशा एकादशी व्रत की कथा, पूजा विधि, मुहूर्त और पारण समय।

पापांकुशा एकादशी व्रत कथा

धर्मराज युधिष्ठिर ने एक बार भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि अश्विन शुक्ल एकादशी के व्रत का महत्व क्या है और इसे कैसे करना चाहिए।

तब भगवान श्रीकृष्ण ने बताया कि इसे पापांकुशा एकादशी कहा जाता है। इस व्रत के फलस्वरूप पाप नष्ट होते हैं और जीवात्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

कथा इस प्रकार है

विंध्य पर्वत पर क्रोधन नाम का एक बहेलिया रहता था। वह अपने जीवन में कई पाप और अधर्म करता था और दूसरों को दुख पहुँचाता था।

मृत्यु के समय यमराज के दूत आए और चेतावनी दी कि कल उसका अंत होगा और वह यमलोक जाएगा।

भयभीत होकर क्रोधन ने वन में जाकर अंगिरा ऋषि के आश्रम में शरण ली और बताया कि उसने जीवन में पाप किए हैं और अब मोक्ष पाना चाहता है।

ऋषि ने उसे बताया कि पापांकुशा एकादशी का व्रत करके वह अपने पापों से मुक्ति पा सकता है और भगवान पद्मनाभ की कृपा से मोक्ष प्राप्त कर सकता है।

क्रोधन ने ऋषि की बात मानी और व्रत विधिपूर्वक रखा। उसने भगवान पद्मनाभ की पूजा की, रात्रि में जागरण किया और अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया।

इस व्रत से उसके सभी पाप नष्ट हुए और मृत्यु के बाद उसे मोक्ष प्राप्त हुआ। जो व्यक्ति यह व्रत श्रद्धा और विधि विधान से करता है, उसे भी मोक्ष की प्राप्ति होती है।

पापांकुशा एकादशी का मुहूर्त और पारण समय

एकादशी तिथि प्रारंभ: 2 अक्टूबर, शाम 07:10 बजे

एकादशी तिथि समाप्ति: 3 अक्टूबर, शाम 06:32 बजे

पूजा मुहूर्त: सुबह 06:15 बजे – 10:41 बजे

सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 06:15 बजे – 09:34 बजे

रवि योग: सुबह 06:15 बजे – 09:34 बजे

पारण समय: 4 अक्टूबर, सुबह 06:16 बजे – 08:37 बजे

इस दिन व्रत करने से मनोवैज्ञानिक शांति, आत्मिक लाभ और पापों से मुक्ति मिलती है।

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