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Papankusha Ekadashi Vrat : जानें पापांकुशा एकादशी का सही समय और व्रत से मिलने वाले लाभ

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Papankusha Ekadashi Vrat : पापांकुशा एकादशी, जो दशहरे के अगले दिन मनाई जाती है, अश्विन मास की प्रमुख एकादशी मानी जाती है।

इस साल यह व्रत 3 अक्टूबर 2025, शुक्रवार को पड़ रहा है। इस दिन विशेष रूप से श्रवण और धनिष्ठा नक्षत्र का संयोग है, साथ ही धृति योग रात 09:45 बजे तक रहेगा।

आश्विन शुक्ल पक्ष की इस एकादशी को पापों को हरने वाली और अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। दशमी तिथि की शाम 7 बजे से एकादशी तिथि प्रारंभ हो जाती है, लेकिन व्रत का पालन 3 अक्टूबर को ही किया जाएगा।

पापांकुशा एकादशी व्रत विधि

इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है। व्रत की सही विधि इस प्रकार है:

भगवान विष्णु का अभिषेक दक्षिणावर्ती शंख से करें। शंख में दूध और केसर मिलाकर अभिषेक करें।

पूरे दिन व्रत का पालन करें और रात को भगवान विष्णु का जागरण करें।

पद्मपुराण में उल्लेख है कि इस दिन पद्मनाभ वासुदेव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

इस व्रत को रखने वाले व्यक्ति के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे नरक नहीं जाना पड़ता। मुनि जो कठोर तपस्या करते हैं, उनका फल भी इस दिन भगवान गरुड़ ध्वज के सामने प्रणाम करने मात्र से प्राप्त हो जाता है।

पृथ्वी पर जितने भी तीर्थ और पवित्र मंदिर हैं, उनका पुण्य केवल भगवान विष्णु के नाम का कीर्तन करने से ही प्राप्त हो जाता है।

इसलिए पापांकुशा एकादशी का व्रत न केवल आध्यात्मिक लाभ देता है, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति भी लेकर आता है।

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