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Pithoragarh Child Marriage Case : अस्पताल में प्रसव के लिए आई नाबालिग, दस्तावेजों ने खोली बाल विवाह की पोल

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पिथौरागढ़, 13 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)

Pithoragarh Child Marriage Case : उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद में बाल विवाह की एक विचलित करने वाली घटना सामने आई है। मामले का खुलासा तब हुआ जब महज 14 साल की एक गर्भवती किशोरी को प्रसव पीड़ा के बाद जिला महिला अस्पताल लाया गया। अस्पताल प्रशासन द्वारा उम्र के दस्तावेजों की जांच करने पर पता चला कि किशोरी का जन्म वर्ष 2012 में हुआ था, जिसके बाद तत्काल पुलिस को सूचित किया गया।

डॉक्टरों के अनुसार, किशोरी की शारीरिक स्थिति बेहद नाजुक है और वह प्रसव की असहनीय पीड़ा से जूझ रही है। रविवार देर शाम तक भी किशोरी का प्रसव नहीं हो सका था और उसे डॉक्टरों की विशेष निगरानी में रखा गया है। अस्पताल कर्मियों ने बताया कि कानूनी कार्रवाई की भनक लगते ही किशोरी के साथ आए कुछ रिश्तेदारों ने दूरी बना ली है, जिससे डरी-सहमी नाबालिग इस कठिन समय में अकेली पड़ गई है।

13 साल की उम्र में हुआ था विवाह

मामले की जांच कर रही एसआई बबीता टम्टा ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि किशोरी का विवाह लगभग एक साल पहले यानी 13 वर्ष की आयु में कर दिया गया था। विवाह के बाद से ही वह अपने कथित पति के साथ रह रही थी। पुलिस अब उन परिस्थितियों और लोगों की जांच कर रही है जिन्होंने इस बाल विवाह को अंजाम दिया। पुलिस का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर विवाह में शामिल अन्य परिजनों के नाम भी सामने आ सकते हैं।

पति के भी नाबालिग होने का अंदेशा

पिथौरागढ़ कोतवाली पुलिस की सूचना पर संबंधित थाने में पॉक्सो एक्ट की धारा 5/6 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। थाना अध्यक्ष के अनुसार, किशोरी के कथित पति के भी नाबालिग होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस उसके आयु प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों का सत्यापन कर रही है। आरोपी भी उसी तहसील के एक गांव का निवासी है।

क्षेत्र में जागरूकता अभियानों के दावों के बीच, एक साल तक इस बाल विवाह का कानून की नजरों से छिपा रहना स्थानीय प्रशासन और सामाजिक तंत्र पर भी सवाल खड़े करता है। फिलहाल पुलिस किशोरी के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए मामले की विस्तृत विवेचना में जुटी है।

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