Pregnancy Headache Causes : प्रेग्नेंसी के दौरान सिरदर्द होना कई महिलाओं के लिए आम लगता है, लेकिन इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है।
अक्सर महिलाएं डॉक्टर के पास जाती हैं, लेकिन सही समाधान नहीं मिल पाता और उन्हें लंबे समय तक दर्द झेलना पड़ता है। हमारे इस कॉलम में हेल्थ एक्सपर्ट के मार्गदर्शन से आप अपने सवाल पूछ सकती हैं और सही दिशा में हल पा सकती हैं।
सिरदर्द के संभावित कारण
प्रेग्नेंसी में सिरदर्द के कई कारण हो सकते हैं। हार्मोनल बदलाव, आँखों की कमजोरी, नींद की कमी और तनाव इसके सामान्य कारण हैं। लेकिन अगर सिरदर्द लगातार रहता है, तो डॉक्टर से जाँच कराना बहुत जरूरी है। कभी-कभी यह प्रेग्नेंसी-इंड्यूस्ड हाइपरटेंशन (PIH) का संकेत भी हो सकता है।
PIH का मतलब है प्रेग्नेंसी के दौरान रक्तचाप बढ़ जाना। इसके लक्षण सिरदर्द, आँखों के सामने धुंधलापन, हाथ-पैरों में सूजन और पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द के रूप में दिख सकते हैं।
अगर इसे नियंत्रित न किया जाए तो मां और बच्चे दोनों के लिए खतरा हो सकता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह से दवा लेना जरूरी है। सिरदर्द कभी-कभी आंखों की कमजोरी या दृष्टि में बदलाव के कारण भी हो सकता है।
इसलिए अपने डॉक्टर को यह जानकारी देना न भूलें। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित करें कि सिरदर्द किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या की वजह से तो नहीं है।
मेनोपॉज और प्रीमेनोपॉज में सामान्य लक्षण
एक 52 वर्षीय पाठिका ने बताया कि उन्हें प्रीमेनोपॉज से जुड़ी समस्याएं जैसे अनिंद्रा, कमजोरी, चिड़चिड़ापन और ओवर थिंकिंग हो रही हैं। डॉक्टर ने बताया कि रिपोर्ट्स सामान्य हैं, बस विटामिन D थोड़ा कम है।
मनोपॉज और प्रीमेनोपॉज के दौरान ये लक्षण आम हैं। अनिंद्रा, हॉट फ्लेश, चिड़चिड़ापन और कमजोरी जैसी परेशानियों का अनुभव बहुत महिलाओं को होता है। इसके अलावा विटामिन D, B12 और कैल्शियम की कमी भी इस समय आम है।
प्राकृतिक उपाय और जीवनशैली में बदलाव
इन समस्याओं से राहत पाने के लिए जीवनशैली में छोटे बदलाव काफी मदद कर सकते हैं। नियमित योग, हल्की-फुल्की वॉक, ध्यान और संतुलित आहार इन लक्षणों को कम करने में सहायक होते हैं। सोयाबीन और इससे बने उत्पादों का सेवन बढ़ाना भी फायदेमंद हो सकता है।
इसके अलावा रोजाना केमोमाइल-टी पीना, ध्यान और प्राणायाम करना भी आराम पहुंचा सकता है। हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) उन महिलाओं के लिए सुझाई जाती है जिन्हें बहुत ज्यादा समस्या होती है, लेकिन इसे हमेशा विशेषज्ञ की देखरेख में ही लेना चाहिए।
डाइट और पोषण पर ध्यान
चाय-कॉफी और नमक का सेवन कम करें। आहार में फल, सब्जियां, मेवे, बीज और बेरीज शामिल करें। ये छोटे-छोटे बदलाव शरीर में पोषण स्तर बनाए रखने में मदद करेंगे और प्रेग्नेंसी व मेनोपॉज से जुड़ी परेशानियों में राहत देंगे।









