देहरादून, 04 अप्रैल, 2026 (दून हॉराइज़न)। जनपद में समाज कल्याण एवं महिला कल्याण विभाग द्वारा दी जाने वाली विभिन्न पेंशन योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए प्रशासन ने अब तक का सबसे बड़ा शुद्धि अभियान शुरू किया है। जिलाधिकारी सविन बंसल के कड़े रुख के बाद मुख्य विकास अधिकारी (CDO) अभिनव शाह ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सभी लाभार्थियों का शत-प्रतिशत भौतिक सत्यापन करने का फरमान जारी कर दिया है।
इस मुहिम का सीधा उद्देश्य उन लोगों को सिस्टम से बाहर करना है जो अपात्र होने के बावजूद सरकारी खजाने का लाभ उठा रहे हैं या जिनकी मृत्यु हो चुकी है। सीडीओ ने स्पष्ट किया है कि 15 जून 2026 तक हर हाल में वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी कर रिपोर्ट जमा करनी होगी।
प्रशासन ने जवाबदेही तय करने के लिए शहरी क्षेत्रों की कमान उपजिलाधिकारियों (SDM) को सौंपी है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह जिम्मेदारी खंड विकास अधिकारियों (BDO) की होगी, जो अपने अधीनस्थ पटवारियों, लेखपालों और ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों के जरिए घर-घर जाकर डेटा क्रॉस-चेक करेंगे।
सत्यापन के दौरान यदि कोई पेंशनर मृत पाया जाता है, तो उसकी मृत्यु की सही तिथि और अपात्र होने की स्थिति में स्पष्ट कारण दर्ज करना अनिवार्य होगा। इस जांच के दायरे में वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांग, किसान, तीलू रौतेली, बौना पेंशन और दिव्यांग बच्चों को मिलने वाली सभी सहायता योजनाएं आएंगी।
आंकड़ों पर गौर करें तो देहरादून में समाज कल्याण विभाग के तहत वृद्धावस्था पेंशन के 76,128 और दिव्यांग पेंशन के 11,596 लाभार्थी मौजूद हैं। इसके अलावा महिला कल्याण विभाग के अंतर्गत 32,011 विधवाओं और 8,140 परित्यक्ता महिलाओं को पेंशन मिल रही है, जिनका भविष्य अब इस सत्यापन रिपोर्ट पर टिका है।
पेंशनर्स की पूरी सूची विभागीय वेबसाइट ssp.uk.gov.in पर अपलोड कर दी गई है। किसी भी तकनीकी सहायता या जानकारी के लिए विभाग ने हेल्पलाइन नंबर 7906905177 जारी किया है, जहां कंप्यूटर ऑपरेटर से संपर्क कर लाभार्थी अपनी स्थिति जान सकते हैं।
गौरतलब है कि उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों में पेंशन वितरण में अनियमितताओं की खबरें आती रही हैं। इस बार प्रशासन ने सख्त लहजे में कहा है कि यदि सत्यापन कार्य में किसी भी स्तर पर शिथिलता पाई गई, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।









