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Sharad Purnima Kheer Vidhi : शरद पूर्णिमा की रात क्यों रखते हैं खीर, जानिए रहस्य

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Sharad Purnima Kheer Vidhi : हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है।

इसे आश्विन पूर्णिमा, रास पूर्णिमा और कोजागर पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धर्मग्रंथों में बताया गया है कि बारहों पूर्णिमा में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है, क्योंकि इसी रात चंद्रमा अपनी सोलहों कलाओं से पूर्ण होता है।

ऐसा विश्वास है कि इस दिन की रात चंद्रकिरणों में अमृत के कण बरसते हैं। परंपरा के अनुसार लोग इस दिन खीर बनाकर चांदनी में रखते हैं।

माना जाता है कि चांद की रोशनी से स्पर्श हुई खीर औषधीय गुणों से भर जाती है और सेहत के लिए अमृत समान हो जाती है।

शरद पूर्णिमा 2025 की तिथि और समय

पंचांग के अनुसार इस साल आश्विन पूर्णिमा तिथि 6 अक्टूबर 2025, सोमवार दोपहर 12:23 बजे शुरू होगी और 7 अक्टूबर सुबह 9:16 बजे समाप्त होगी।

चूंकि चंद्रमा का उदय 6 अक्टूबर की शाम को होगा, इसलिए शरद पूर्णिमा का पर्व उसी दिन मनाया जाएगा।

शरद पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:39 से 05:28 तक
  • अभिजीत मुहूर्त: 11:45 से 12:32 दोपहर तक
  • निशीथ काल (रात्रि पूजा का समय): 11:45 रात से 12:34 तक

इस दिन भक्तजन व्रत रखकर भगवान सत्यनारायण की कथा सुनते हैं और रात्रि में माता लक्ष्मी की पूजा के साथ चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करते हैं।

शरद पूर्णिमा पर चंद्रोदय का समय

6 अक्टूबर 2025 को चंद्रोदय शाम 05:27 बजे होगा और चंद्रास्त 7 अक्टूबर की सुबह 06:14 बजे होगा।

खीर रखने का सही समय

शरद पूर्णिमा की रात चांदनी सबसे उज्ज्वल और पवित्र मानी जाती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस साल खीर रखने का सर्वश्रेष्ठ समय रात 10:37 बजे से 12:09 बजे तक है।

इस अवधि में खीर को खुले आकाश के नीचे रखने से घर में सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

योग और नक्षत्र

इस बार की शरद पूर्णिमा वृद्धि योग और उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में पड़ रही है।

  • वृद्धि योग: प्रातः से दोपहर 01:14 बजे तक
  • उत्तर भाद्रपद नक्षत्र: 7 अक्टूबर तड़के 04:01 बजे तक

इन योगों में पूजा-अर्चना और दान-पुण्य का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है।

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