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Silver Prices : तीन आसान तरीके जिससे आप चांदी में निवेश कर अपनी संपत्ति बढ़ा सकते हैं

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Silver Prices : त्योहारों का सीजन आते ही बाजार में चमक बिखरने लगी है, लेकिन इस बार चांदी की चमक सोने से कम नहीं है। धनतेरस और दिवाली से पहले की खरीदारी के मौसम में चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। इस कीमती धातु की चमक इस बार न सिर्फ आभूषण बाजार में बल्कि निवेश की दुनिया में भी दिख रही है।

जहां सोना लगातार रिकॉर्ड बना रहा है, वहीं चांदी भी तेजी से नई ऊंचाइयों को छू रही है। त्योहारों के इस समय में भारत के कई शहरों में चांदी की कीमतें अपने सर्वाधिक स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे निवेशकों में उत्साह और बाजार में हलचल दोनों बढ़ गए हैं।

निवेशकों का झुकाव चांदी की ओर क्यों बढ़ा

चांदी को लंबे समय से एक सुरक्षित और स्थायी निवेश माना जाता है। इस साल इसकी तेजी का कारण बढ़ती औद्योगिक मांग और निवेशकों की बढ़ती रुचि है। जैसे-जैसे धनतेरस और दिवाली नजदीक आ रहे हैं, लोग न केवल परंपरा के लिए बल्कि भविष्य की कमाई के दृष्टिकोण से भी चांदी में निवेश कर रहे हैं।

कई म्यूचुअल फंड कंपनियों ने जहां गोल्ड ETF में नए निवेश अस्थायी रूप से रोक दिए हैं, वहीं निवेशक अब Silver ETF (Silver ETF) और Digital Silver (Digital Silver) की ओर रुख कर रहे हैं। ये ऑप्शन न सिर्फ आसान हैं बल्कि Silver ETF (Silver ETF) के जरिए बाजार की तेजी का फायदा भी उठा सकते हैं।

चांदी में निवेश करने के तीन खास तरीके

चांदी में निवेश के तीन प्रमुख माध्यम हैं, जो हर तरह के निवेशक के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। पहला है Physical Silver (Physical Silver), जिसमें सिक्के, बार और आभूषण शामिल हैं – ये परंपरागत तरीका है जो त्योहारों में खरीदारी को और मजेदार बनाता है। दूसरा है Digital Silver (Digital Silver), जिसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से आसानी से खरीदा जा सकता है, बिना स्टोरेज की टेंशन के।

और तीसरा है Silver ETF (Silver ETF), जो म्यूचुअल फंड की तरह स्टॉक एक्सचेंज पर कारोबार किया जाता है और बाजार की तेजी का पूरा फायदा देता है। इन तीनों माध्यमों के अपने फायदे और टैक्स नियम हैं, जिनकी जानकारी निवेशक के लिए जरूरी है, खासकर जब Silver ETF (Silver ETF) या Physical Silver (Physical Silver) में निवेश की बात हो।

चांदी बेचने पर कितना टैक्स देना होगा

Silver ETF (Silver ETF) को पूंजीगत संपत्ति की श्रेणी में रखा गया है। अगर इसे 12 महीने या उससे अधिक समय तक रखा जाए तो इससे होने वाले लाभ को Long Term Capital Gain (LTCG) माना जाता है और इस पर 12.5% की दर से टैक्स लगाया जाता है। वहीं अगर निवेशक 12 महीने से पहले बेच देते हैं तो यह Short Term Capital Gain (STCG) माना जाएगा और टैक्स उनकी आयकर स्लैब दर के अनुसार लगेगा।

Physical Silver (Physical Silver) जैसे कि सिक्के, बार और आभूषण के लिए यह अवधि थोड़ी अधिक है। अगर इन्हें 24 महीने या उससे अधिक समय तक रखा जाए तो 12.5% की दर से LTCG टैक्स लगता है। लेकिन अगर 24 महीने से पहले बेचा जाए तो उस पर STCG के रूप में स्लैब दरों पर टैक्स देना पड़ता है।

चांदी पर GST और मेकिंग चार्ज का प्रभाव

भौतिक चांदी की खरीद पर 3% GST देना जरूरी है, जो Physical Silver (Physical Silver) खरीदते समय ध्यान रखना पड़ता है। वहीं अगर आप चांदी के आभूषण खरीदते हैं तो आपको मेकिंग चार्ज भी चुकाना पड़ता है, जो GST के दायरे में आता है। GST परिषद ने सोने और चांदी दोनों पर 3% की दर बरकरार रखी है। इस फैसले से त्योहारों और शादी के सीजन में खरीदारों को शुद्धता मिलती है, जब भारत में सर्राफा बाजार की मांग चरम पर होती है।

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