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SIP investment : 30,000 करोड़ का रिकॉर्ड! SIP में पैसा डालकर लोग रातोंरात बन रहे अमीर

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SIP investment : शेयर बाजार भले ही एक साल पहले के अपने हाई लेवल से अभी भी नीचे चल रहा हो, लेकिन SIP की रफ्तार रुकने का नाम नहीं ले रही। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की संस्था AMFI के ताज़ा आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है — हर महीने होने वाला SIP निवेश अब रिकॉर्ड 30,000 करोड़ रुपये के करीब पहुँच गया है! अक्टूबर 2024 में यह आँकड़ा सिर्फ़ 25,323 करोड़ रुपये था। यानी एक झटके में ही हजारों करोड़ का उछाल।

अब SIP का योगदान पूरे म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की कुल संपत्ति (AUM) का करीब 20% हो चुका है। छोटे-छोटे भारतीय निवेशक इसे ऐसे अपनाने लगे हैं जैसे हर महीने मॉल जाना या EMI भरना। SIP अब सिर्फ़ निवेश नहीं, एक आदत बन चुका है।

SIP को जादुई छड़ी समझने की भारी भूल

म्यूचुअल फंड कंपनियाँ, एजेंट और फाइनेंशियल एडवाइज़र लगातार SIP के फायदे गिना रहे हैं — इसी का नतीजा है कि लोगों में निवेश का अनुशासन तो आया, पर कई नए निवेशकों के मन में गलतफहमी भी घर कर गई।

कई लोग अब मानने लगे हैं कि SIP में पैसा डाल दिया तो नुकसान हो ही नहीं सकता, SIP बाजार के झटकों से पूरी तरह बचाता है, और ये कोई जादुई फॉर्मूला है जो हमेशा मुनाफा ही देगा।

लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है

ईटी की रिपोर्ट में फिनोवेट के को-फाउंडर और CEO नेहल मोटा कहते हैं — “SIP आज शेयर बाजार में निवेश का सबसे आसान रास्ता बन गया है, पर इसकी लोकप्रियता के साथ मिथक भी बढ़ रहे हैं। लोग सोचने लगे हैं कि SIP ज्यादा सुरक्षित है और हमेशा अच्छा रिटर्न देगा — ऐसा बिल्कुल नहीं है।”

SIP में निवेश के बाद बेफिक्र हो रहे हैं लोग?

SIP में जो सुरक्षा का अहसास होता है, वो असल में लंपसम निवेश (एकमुश्त निवेश) के मुकाबले होता है। एकमुश्त निवेश में सारा पैसा बाजार के पीक पर लग जाने का डर रहता है।

फिसडम के रिसर्च हेड नीरव करकेरा बताते हैं — “बाजार को सही टाइम पर पकड़ना बेहद मुश्किल है। SIP इस टाइमिंग की टेंशन को खत्म कर देता है।”
SIP की वजह से यूनिट्स अलग-अलग लेवल पर खरीदी जाती हैं, जिससे औसत खरीद भाव कम रहता है — इसे रुपी कॉस्ट एवरेजिंग कहते हैं।

भारी बाजार गिरावट में भी SIP बचाता है?

एक्सपर्ट साफ कहते हैं — SIP का असली फायदा ये नहीं कि इसमें कभी नुकसान नहीं होता, बल्कि ये आपको गलत टाइम पर जल्दबाजी में फैसला लेने से बचाता है। हर महीने ऑटो-डेबिट होने से निवेश में नियमितता आती है और लंबे समय में पोर्टफोलियो को हल्की बढ़त मिलती है।

SIP कोई जादुई दवा नहीं, बल्कि बाजार के उतार-चढ़ाव को हैंडल करने का स्मार्ट तरीका है। बड़े निवेशक अक्सर लंपसम पसंद करते हैं, जबकि सैलरी पाने वाले मिडिल क्लास के लिए SIP सबसे सुविधाजनक है।

हालांकि सिर्फ SIP करते रहने से बड़े फाइनेंशियल गोल पूरे नहीं हो जाते। असली कमाल तब होता है जब पैसा लंबे समय तक निवेशित रहे और जरूरत पड़ने पर सही मौके पर लंपसम निवेश भी किया जाए। यानी SIP + स्मार्ट लंपसम का कॉम्बो ही असली गेम चेंजर है।

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