नई दिल्ली, 29 नवंबर 2025 : बिहार के किसानों के लिए खुशखबरी! अगर आप भी खेती से आमदनी बढ़ाना चाहते हैं और गाँव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहते हैं, तो सरकार ने आपके लिए खास तोहफा दिया है। मशरूम की खेती को बढ़ावा देने के लिए एक नई सब्सिडी योजना शुरू की गई है। इस योजना से छोटे-छोटे किसान भी कम लागत में आधुनिक तरीके से मशरूम उगा सकेंगे और अपनी कमाई कई गुना बढ़ा सकेंगे।
90% तक सब्सिडी मिल रही मशरूम किट पर
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत ये है कि धान (पैडी) और ऑयस्टर मशरूम की किट पर पूरे 90% तक सब्सिडी दी जा रही है। एक किट की असली कीमत सिर्फ 75 रुपये है, जिसमें से 67.50 रुपये सरकार देगी। मतलब किसान को महज 7.50 रुपये ही देने पड़ेंगे! एक किसान को कम से कम 25 और ज्यादा से ज्यादा 100 किट मिल सकती हैं। ये सुविधा राज्य के हर जिले में उपलब्ध है, यानी कोई भी किसान पीछे नहीं रहेगा।
बटन मशरूम पर भी भारी छूट
बटन मशरूम की डिमांड दिन-ब-दिन बढ़ रही है। इसे देखते हुए सरकार ने बटन मशरूम किट पर भी 90% सब्सिडी का ऐलान किया है। एक किट की कीमत 90 रुपये रखी गई है और 81 रुपये सब्सिडी मिलेगी। यहाँ भी 25 से 100 किट तक ले सकते हैं। पूरे बिहार में ये सुविधा एक समान लागू है।
बाल्टी में मशरूम उगाने का भी मौका
अगर आप कम जगह में मशरूम उगाना चाहते हैं तो बाल्टी मशरूम किट भी उपलब्ध है। एक किट की कीमत 300 रुपये है और सब्सिडी 270 रुपये तक मिल रही है। एक किसान 2 से 10 किट तक ले सकता है। अच्छी बात ये है कि जो किसान पैडी, ऑयस्टर या बटन किट ले रहे हैं, वो बाल्टी किट का फायदा भी उठा सकते हैं।
झोपड़ी में मशरूम उत्पादन के लिए 50% मदद
कई किसानों के पास पक्का शेड बनाने की हैसियत नहीं होती। उनके लिए सरकार ने झोपड़ी आधारित मशरूम उत्पादन के लिए 50% तक की सहायता देने का फैसला किया है। कम संसाधनों में भी इस बिजनेस को शुरू करने का शानदार मौका।
योजना का फायदा कैसे उठाएं?
इस योजना में आवेदन बिल्कुल ऑनलाइन करना है। आपको बस horticulture.bihar.gov.in पर जाना है और फॉर्म भरना है। कोई दिक्कत हो तो अपने जिले के बागवानी अधिकारी से संपर्क करें। सरकार का मानना है कि इससे किसान पारंपरिक खेती छोड़कर ऊँची कीमत वाली फसलों की तरफ बढ़ेंगे।
योजना का बड़ा मकसद
मशरूम की खेती में लागत कम, जगह कम और मुनाफा बहुत ज्यादा है। बिहार सरकार चाहती है कि गाँवों में रोजगार बढ़े और किसान आत्मनिर्भर बनें। इस योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिलेगी और छोटे किसान भी अच्छी कमाई कर सकेंगे।









