Stomach Pain Causes : हम में से कई लोगों ने घर के बुजुर्गों को यह कहते सुना होगा – “नाभि खिसक गई है” या “गोला खिसक गया।” लेकिन बहुत से लोग नहीं जानते कि इसका मतलब क्या है और यह समस्या कितनी असहज कर सकती है।
नाभि दरअसल शरीर का एक अहम केंद्र बिंदु होती है। कहा जाता है कि जब यह अपनी सही जगह से थोड़ा भी हिल जाती है, तो शरीर में असंतुलन महसूस होने लगता है। इस स्थिति को ही आम भाषा में “नाभि खिसकना” या “धरण खिसकना” कहा जाता है।
नाभि खिसकने के कारण
नाभि के अपनी जगह से हटने के कई कारण हो सकते हैं। अक्सर देखा गया है कि –
- अचानक भारी वजन उठाने पर
- झुकते समय शरीर का संतुलन बिगड़ने पर
- लंबी दूरी तक दौड़ने या कूदने पर
- सीढ़ियाँ चढ़ते समय झटका लगने पर
- या बहुत ज्यादा तेल-मसाले वाले भोजन के बाद
नाभि अपनी स्थिति से थोड़ा सरक जाती है। कई बार यह मामूली समस्या होती है, लेकिन कुछ लोगों में इसके लक्षण काफी तकलीफ़देह भी हो सकते हैं।
नाभि खिसकने के लक्षण
अगर नाभि खिसक जाती है, तो शरीर कई संकेत देने लगता है। ध्यान देने योग्य कुछ प्रमुख लक्षण हैं –
- पेट के बीचों-बीच या नीचे के हिस्से में दर्द महसूस होना
- बार-बार उल्टी या दस्त लगना
- जी मिचलाना या घबराहट होना
- पाचन बिगड़ जाना
- महिलाओं में पीरियड्स का चक्र जल्दी या देर से आना
- बच्चों में पेट फूलना या अचानक भूख कम होना
इन लक्षणों को अक्सर सामान्य गैस या अपच समझ लिया जाता है, लेकिन बार-बार होने पर ध्यान देना जरूरी है।
नाभि खिसकने की पहचान कैसे करें
गाँवों और छोटे कस्बों में बुजुर्ग आज भी नाभि खिसकने का पता लगाने के पारंपरिक तरीके अपनाते हैं। नाभि पर हल्का दबाव देकर उसकी धड़कन महसूस करें।
अगर वहाँ हल्की धड़कन महसूस होती है, तो नाभि अपनी जगह पर है। लेकिन अगर धड़कन गायब लगे, तो इसका मतलब नाभि खिसक चुकी है।
नाभि से दोनों पैरों के अंगूठे तक की दूरी किसी धागे या रस्सी से नापें। अगर दोनों तरफ की दूरी में अंतर मिलता है, तो समझ लीजिए नाभि अपनी जगह से हिल गई है।
हालाँकि, इन घरेलू तरीकों पर पूरी तरह निर्भर रहना ठीक नहीं है। अगर दर्द या उल्टी लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।
नाभि खिसकने के घरेलू उपाय
भारत में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में इसके कई सरल और सुरक्षित उपाय बताए गए हैं –
किसी अनुभवी व्यक्ति या फिजियोथेरेपिस्ट से हल्की मालिश करवाने से राहत मिलती है। इससे नाभि धीरे-धीरे अपनी जगह पर लौट आती है।
नाभि में रोजाना दो-तीन बूंद सरसों का तेल डालना बहुत लाभदायक माना जाता है। इससे आसपास की नसों को आराम मिलता है और दर्द कम होता है।
सौंफ का सेवन पाचन को दुरुस्त करता है, जबकि आंवले का रस शरीर में ठंडक और संतुलन बनाए रखता है। दोनों चीज़ें मिलकर नाभि के खिसकने से होने वाली तकलीफ़ में राहत देती हैं।
पेट पर हल्की गर्म सिंकाई करने से मांसपेशियाँ रिलैक्स होती हैं और नाभि धीरे-धीरे अपनी जगह पर आने लगती है।
अगर नाभि खिसकने के लक्षण दो-तीन दिनों से ज़्यादा बने रहें, उल्टी या दस्त बार-बार हों, या पेट में सूजन महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। कई बार ये लक्षण गैस्ट्रिक इंफेक्शन या अन्य गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकते हैं।
सावधानियां
भारी वजन उठाने से पहले पेट को अंदर खींचकर सांस नियंत्रित करें। लंबे समय तक खाली पेट ना रहें।
संतुलित और हल्का भोजन करें। योग और नियमित व्यायाम से शरीर का संतुलन बनाए रखें।
नाभि खिसकना कोई बहुत बड़ी बीमारी नहीं है, लेकिन अगर इसे नजरअंदाज किया जाए तो यह परेशानी बढ़ा सकती है।
सही पहचान, संतुलित आहार और हल्की मालिश से इससे आराम पाया जा सकता है।









