Swastik in Vastu : वास्तु शास्त्र में स्वास्तिक का प्रतीक चार दिशाओं और चार तत्वों—अग्नि, जल, वायु और पृथ्वी—का होता है। यह न सिर्फ घर की सजावट का हिस्सा है, बल्कि ऊर्जा संतुलन और सकारात्मकता लाने का माध्यम भी है।
घर या ऑफिस में स्वास्तिक लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। लेकिन यह तभी सही परिणाम देता है जब इसे सही दिशा और सही तरीके से बनाया जाए।
उत्तर दिशा: अवसर और करियर की दिशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार, उत्तर दिशा अवसरों और करियर की दिशा मानी जाती है। यह दिशा कुबेर और जल तत्व से जुड़ी है। घर या ऑफिस की उत्तर दिशा की दीवार पर नीला स्वास्तिक लगाने से नौकरी, व्यवसाय और नए अवसरों में प्रगति होती है।
इसे हमेशा साफ-सुथरी जगह पर लगाएं और समय-समय पर साफ करें। नीला रंग जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है, जो घर में सुख-समृद्धि लाने में मदद करता है।
दक्षिण-पूर्व दिशा: आर्थिक समृद्धि
दक्षिण-पूर्व दिशा अग्नि तत्व से संबंधित है और यह धन और आर्थिक स्थिरता का प्रतीक मानी जाती है। इस दिशा में लाल रंग का स्वास्तिक बनाना शुभ होता है।
घर की रसोई, तिजोरी या पैसे रखने वाले स्थान के पास लाल स्वास्तिक लगाने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और धन का प्रवाह बढ़ता है। कुमकुम या हल्दी से इसे बनाने पर इसका प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है।
पश्चिम दिशा: रिश्तों और सामाजिक सम्मान
पश्चिम दिशा वायु तत्व से जुड़ी है और यह परिवार, रिश्तों और सामाजिक सम्मान के लिए महत्वपूर्ण है। इस दिशा में सफेद स्वास्तिक लगाने से घर में प्रेम और सहयोग बढ़ता है।
परिवारिक कलह कम होती है और सामाजिक रिश्तों में सुधार आता है। इसे चंदन या सफेद रंग से बनाना सबसे प्रभावी माना जाता है। लिविंग रूम में सफेद स्वास्तिक लगाने से सकारात्मक माहौल बनता है।
मुख्य द्वार पर स्वास्तिक: घर में सुख-शांति
मुख्य द्वार को वास्तु में ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना जाता है। मुख्य द्वार पर स्वास्तिक लगाने से नकारात्मक ऊर्जा बाहर रहती है और सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है।
कुमकुम, हल्दी या रंगोली से मुख्य द्वार के दोनों ओर स्वास्तिक बनाना शुभ होता है। ध्यान रखें कि इसे उल्टा न बनाएं और हमेशा साफ-सुथरा रखें। यह उपाय घर में सुख-शांति और समृद्धि लाने में मदद करता है।
स्वास्तिक बनाने के कुछ महत्वपूर्ण नियम
स्वास्तिक का अधिकतम लाभ पाने के लिए कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है। इसे हमेशा पवित्र और साफ स्थान पर बनाएं। स्वास्तिक को उल्टा न बनाएं, क्योंकि यह अशुभ माना जाता है।
कुमकुम, हल्दी, चंदन या रंगों का उपयोग करके इसे सजाएं। नियमित रूप से इसे साफ करें और समय-समय पर नया स्वास्तिक बनाएं। इसे बनाते समय मन में सकारात्मक विचार और शुभ मंत्रों का जाप करें, जैसे ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।’ इससे इसके प्रभाव में वृद्धि होती है।
स्वास्तिक से घर में सुख-समृद्धि
वास्तु शास्त्र के अनुसार, स्वास्तिक लगाने से घर में सुख-समृद्धि आती है। यह परिवार में प्रेम और सहयोग बढ़ाता है, पारिवारिक कलह कम करता है और आर्थिक समस्याओं को दूर करता है।
स्वास्तिक नकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित कर मन को शांत रखता है। घर में सकारात्मक माहौल बनता है, जिससे स्वास्थ्य और मानसिक शांति में सुधार होता है।









