नई दिल्ली, 29 नवंबर 2025 : केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स में इन दिनों भयंकर गुस्सा है। ८वीं वेतन आयोग के लिए बने नियमों यानी Terms of Reference (ToR) ने सबको हैरान कर दिया है।
लाखों कर्मचारी संगठन और यूनियन चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे हैं कि सरकार ने जानबूझकर करीब ६९ लाख पेंशनर्स को इस नए वेतन आयोग के दायरे से बाहर रख दिया है। ऊपर से ये भी साफ नहीं किया गया कि आयोग की सिफारिशें कब से लागू होंगी। बस यही दो बातें कर्मचारियों के गले नहीं उतर रही हैं।
यूनियनों का आरोप है कि सरकार ने एकतरफा तरीके से आयोग बनाया और उसके नियम भी खुद ही तय कर लिए। अब तो कर्मचारी संगठन खुलेआम धमकी दे रहे हैं कि अगर ये गलतियाँ नहीं सुधारी गईं तो बड़े आंदोलन और प्रदर्शन होंगे। अभी तक सरकार की तरफ से इस पूरे मामले पर चुप्पी छाई हुई है। कोई जवाब नहीं, कोई स्पष्टीकरण नहीं।
संसद के शीतकालीन सत्र पर टिकीं निगाहें
अब सबकी नजरें १ दिसंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र पर लगी हैं। माना जा रहा है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार ८वीं वेतन आयोग को लेकर सरकार का पक्ष साफ करेंगी। पहले भी हर सत्र में इस मुद्दे पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इस बार सांसद सीधे ToR में हुई गड़बड़ियों को लेकर सरकार को घेरने वाले हैं। पेंशन, महंगाई भत्ता, रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले दूसरे फायदे – ये सारे पुराने मुद्दे भी जोर-शोर से उठेंगे।
८वीं वेतन आयोग और DA विलय – दो सबसे बड़े सवाल
सांसद आनंद भदौरिया ने सरकार से लिखित जवाब मांगा है। उनके दो सबसे अहम सवाल हैं –
- ८वीं वेतन आयोग कब बनेगा?
- महंगाई भत्ता (DA) को बेसिक पे में कब मिलाया जाएगा?
लोकसभा और राज्यसभा की वेबसाइट पर ऐसे सैकड़ों सवाल पहले ही दर्ज हो चुके हैं। अभी ७वीं वेतन आयोग चल रहा है जो १ जनवरी २०१६ से लागू हुआ था। हर दस साल में नया वेतन आयोग बनता आया है, इसलिए २०२६ में नया आयोग लागू होने की पूरी उम्मीद है। करीब १ करोड़ केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि सरकार ToR वाली गड़बड़ पर क्या बोलेगी।
६९ लाख पेंशनर्स को बाहर रखने का आरोप
यूनियनों का दावा है कि सरकार ने ToR में शब्दों की बाजीगरी करके जानबूझकर ६.९ मिलियन पेंशनर्स को बाहर कर दिया। अब सबकी निगाहें इस आरोप पर सरकार के जवाब पर टिकी हैं। दूसरा सबसे बड़ा विवाद महंगाई भत्ता और महंगाई राहत (DR) को बेसिक सैलरी में मिलाने का है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पिछले तीन दशकों में DA रिटेल महंगाई से पीछे रह गया है। अभी DA ५०% से ज्यादा हो चुका है – पहले यही नियम था कि ५०% होते ही DA मर्ज हो जाता था। DA मर्ज होने से तुरंत राहत मिलती है, पेंशन बढ़ती है और दूसरे भत्ते भी बढ़ जाते हैं।
अब देखना ये है कि संसद सत्र में सरकार इन सारे सवालों का क्या जवाब देती है। कर्मचारी और पेंशनर्स की साँसें अटकी हुई हैं।









