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अन्ना आंदोलन से निकले इस चेहरे ने बढ़ाई हलचल, उत्तराखंड भाजपा में एंट्री की तैयारी

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पौड़ी गढ़वाल। उत्तराखंड की सियासत में इन दिनों एक नाम को लेकर जबरदस्त चर्चा है। लंबे समय तक जनहित की लड़ाई लड़ने वाले और व्यवस्था को आईना दिखाने वाले नमन चन्दोला अब भाजपा का झंडा थामने की तैयारी में हैं। सूत्रों की मानें तो नमन चन्दोला का भगवा परिवार में शामिल होना लगभग तय हो चुका है। इसे राज्य की राजनीति में एक ऐसे मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ एक आंदोलनकारी अब नीति-निर्माण की मुख्यधारा में उतरने को तैयार है।

नमन चन्दोला का सार्वजनिक जीवन किसी परिचय का मोहताज नहीं रहा है। उन्होंने अपने सफर की शुरुआत अन्ना आंदोलन की उस लहर से की थी, जिसने देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक नई चेतना जगाई थी।

उसके बाद से ही नमन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने उत्तराखंड के पहाड़ों की सबसे बड़ी टीस-भ्रष्टाचार, लचर स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा का गिरता स्तर और बेतहाशा पलायन-को लेकर न केवल आवाज उठाई, बल्कि शासन-प्रशासन की नींद भी उड़ाई।

‘पौड़ी बचाओ संघर्ष समिति’ के संयोजक के तौर पर उन्होंने कई बड़े जनआंदोलनों की कमान संभाली। नमन की पहचान एक ऐसे बेबाक और निडर चेहरे की रही है, जो किसी भी पद पर न रहते हुए भी जनता के लिए सड़कों पर डटा रहा।

सियासी पंडितों का आकलन है कि अगर वे भाजपा में शामिल होते हैं, तो पार्टी को एक ऐसा नेतृत्व मिलेगा जिसकी जड़ें जमीन से जुड़ी हैं। उनकी साफ-सुथरी छवि और ईमानदार कार्यशैली पार्टी के लिए एक बड़ी ‘एसेट’ साबित हो सकती है।

चर्चा यह भी है कि नमन चन्दोला अब सिर्फ सवाल उठाने तक सीमित नहीं रहना चाहते। उनके करीबियों का कहना है कि वे अब व्यवस्था के भीतर रहकर समाधान खोजने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। उनका मानना है कि आंदोलन से संगठन की ओर बढ़ना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, ताकि जनता की समस्याओं को नीतिगत स्तर पर सुलझाया जा सके।

भाजपा के लिए भी यह एक फायदे का सौदा है क्योंकि चन्दोला के पास व्यापक जनसंपर्क और संगठन बनाने की अद्भुत क्षमता है।

इस संभावित जॉइनिंग को लेकर पौड़ी गढ़वाल के स्थानीय कार्यकर्ताओं और नमन के समर्थकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। लोगों को उम्मीद है कि जो आवाज अब तक सड़कों पर गूंजती थी, वह अब सत्ता के गलियारों में गूंजेगी और पहाड़ों के हक की बात राष्ट्रीय स्तर तक मजबूती से पहुंचेगी।

हालांकि, इस औपचारिक जुड़ाव की तारीख का इंतजार है, लेकिन हवाओं का रुख बता रहा है कि उत्तराखंड की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होने वाला है।

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