देहरादून, 10 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग में ‘मानचित्रक’ (Draftsman) के पद पर चयनित 12 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त कर्मियों को कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण और व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का निर्देश दिया।
पारदर्शी भर्ती और सुशासन का दावा
नियुक्ति पत्र वितरण के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य की भर्ती प्रणाली में आए बदलावों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सख्त नकल विरोधी कानून लागू होने के बाद युवाओं का चयन अब केवल योग्यता के आधार पर हो रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस पारदर्शी प्रक्रिया का ही परिणाम है कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक 30 हजार से अधिक युवाओं को विभिन्न सरकारी सेवाओं में नियुक्तियां दी जा चुकी हैं। उन्होंने इसे सरकार की युवाओं के प्रति प्रतिबद्धता और सुशासन का प्रत्यक्ष प्रमाण बताया।
कृषि और बागवानी के लिए नया रोडमैप
मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र की प्राथमिकताओं पर चर्चा करते हुए कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य खेती को युवाओं के लिए आकर्षक और लाभप्रद बनाना है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में प्राकृतिक खेती और मिलेट (श्री अन्न) के उत्पादन व विपणन को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, आधुनिक तकनीक का समावेश और फसल विविधीकरण पर जोर दिया जा रहा है।
सेब और कीवी मिशन पर फोकस
राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली बागवानी पर ध्यान केंद्रित कर रही है। मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया कि सेब, कीवी और औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए विभाग विशेष योजनाएं चला रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ सकें।
कार्यक्रम में कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, सचिव कृषि एस.एन. पाण्डेय, अपर सचिव आनंद श्रीवास्तव समेत विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
कृषि विभाग की कार्यक्षमता में वृद्धि
नवनियुक्त मानचित्रकों की तैनाती से विभाग के तकनीकी कार्यों, भूमि सर्वेक्षण और कृषि योजनाओं के मानचित्रण में तेजी आएगी। यह सीधे तौर पर ग्रामीण विकास और सिंचाई परियोजनाओं के क्रियान्वयन को प्रभावित करेगा, जिससे किसानों को समयबद्ध तकनीकी सहायता मिल सकेगी।









