मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में देहरादून सचिवालय में आयोजित कैबिनेट बैठक संपन्न हो गई है, जिसमें विभिन्न विभागों से जुड़े 6 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। इस बैठक में मुख्य रूप से गृह, श्रम, वन और कृषि विभाग के नीतिगत सुधारों और पदों के सृजन को स्वीकृति प्रदान की गई है। सरकार ने दैनिक श्रमिकों के वेतनमान और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की मजबूती के लिए अहम कदम उठाए हैं।
देहरादून। (Uttarakhand Cabinet Decisions) उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित सचिवालय में बुधवार, 11 फरवरी को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में कैबिनेट की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सरकार ने जनता और कर्मचारियों से जुड़े 6 अहम प्रस्तावों पर अपनी आधिकारिक मुहर लगा दी है। कैबिनेट के इन फैसलों में श्रम विभाग से दो, गृह विभाग से दो, जबकि वन और कृषि विभाग से एक-एक बड़े निर्णय शामिल हैं, जो प्रदेश के विकास और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करेंगे।
वन विभाग के दैनिक श्रमिकों को न्यूनतम वेतन की सौगात
राज्य सरकार ने वन विभाग में लंबे समय से कार्यरत दैनिक श्रमिकों को बड़ी राहत दी है। विभाग में कुल 893 दैनिक श्रमिक कार्यरत हैं, जिनमें से 314 को पहले से ही न्यूनतम वेतनमान मिल रहा था। कैबिनेट ने आज शेष बचे 579 दैनिक श्रमिकों को भी 18 हजार रुपये का न्यूनतम वेतनमान देने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले से प्रदेश के सैकड़ों परिवारों को आर्थिक मजबूती मिलेगी और लंबे समय से चली आ रही उनकी मांग पूरी हुई है।
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और गृह विभाग के निर्णय
नशे के खिलाफ ‘ड्रग्स फ्री देवभूमि’ अभियान को गति देते हुए गृह विभाग के तहत बड़ा फैसला लिया गया है। वर्ष 2022 में गठित एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के लिए राज्य स्तर पर 22 नए पदों के सृजन को स्वीकृति दी गई है। इसके अतिरिक्त, कारागार अधिनियम में भी महत्वपूर्ण संशोधन किया गया है। अब ‘हैब्युच्वल ऑफेंडर’ यानी बार-बार अपराध करने वाले अपराधियों की परिभाषा के लिए केंद्र सरकार के मानकों को अपना लिया गया है।
स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती और श्रम विभाग के संशोधन
श्रम विभाग के अंतर्गत ESI डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए लेबर मेडिकल सर्विस नियमावली 2006 में संशोधन किया गया है। इससे अब 94 रिक्त पदों पर भर्ती के साथ-साथ प्रमोशन की प्रक्रिया भी सुगम हो सकेगी। साथ ही, कोविड काल के दौरान बोनस कटौती से संबंधित ‘पेमेंट ऑफ बोनस संशोधन एक्ट’ को केंद्र से वापस लेने का निर्णय लिया गया है। सरकार के इस कदम से स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
कृषि और सूक्ष्म खाद्य उद्योगों को मिला विस्तार
कृषि विभाग के क्षेत्र में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना को विस्तार दिया गया है। कैबिनेट ने तय किया है कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना की तर्ज पर प्रदेश में चल रही मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना भी साल 2025-26 तक जारी रहेगी। इससे स्थानीय उत्पादों की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग से जुड़े लघु उद्योगों को सरकारी सहायता मिलती रहेगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।









