उत्तराखंड कैबिनेट ने विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए ऐतिहासिक ‘लैंड परचेज पॉलिसी’ को मंजूरी दे दी है। अब सरकारी विभाग भू-अधिग्रहण की लंबी प्रक्रिया के बजाय आपसी सहमति से सीधे किसानों और आम लोगों से जमीन खरीद सकेंगे। इसके अलावा, कैबिनेट ने भूजल के व्यावसायिक इस्तेमाल पर शुल्क लगाने और चिन्यालीसौड़ व गौचर हवाई पट्टी को रक्षा मंत्रालय को सौंपने का भी निर्णय लिया है।
Uttarakhand Cabinet Decisions : उत्तराखंड सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की सबसे बड़ी बाधा को दूर कर दिया है। सरकारी योजनाओं के लिए अब जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition) के पेंच में नहीं फंसना पड़ेगा।
बुधवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में नई ‘लैंड परचेज पॉलिसी’ (Land Purchase Policy) पर मुहर लगा दी गई। इसके तहत सरकारी विभाग अब सीधे आम लोगों या किसानों से जमीन खरीद सकेंगे।
इसके साथ ही सरकार ने भूजल (Groundwater) के व्यावसायिक दोहन पर शुल्क लगाने का कड़ा फैसला लिया है। बैठक में कुल 8 प्रस्तावों को मंजूरी मिली, जिसमें नई यूनिवर्सिटी और सिडकुल की जमीन से जुड़े नियम भी शामिल हैं।
आपसी सहमति से तय होंगे जमीन के रेट
अभी तक सरकारी योजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण कानून का सहारा लिया जाता था। यह प्रक्रिया बेहद लंबी थी और अक्सर मुआवजे को लेकर मामला कोर्ट में अटक जाता था। सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने स्पष्ट किया कि नई नीति के तहत विभाग भूस्वामी के साथ बैठकर समझौता करेंगे।
आपसी सहमति से जमीन के रेट तय होंगे और सीधे रजिस्ट्री होगी। इससे भूस्वामियों को मौजूदा सर्किल रेट के चार गुना तक के प्रावधान के अनुसार बेहतर और त्वरित मुआवजा मिल सकेगा, वहीं प्रोजेक्ट्स समय पर शुरू हो पाएंगे।
भूजल का उपयोग अब मुफ्त नहीं
कैबिनेट ने प्राकृतिक जल स्रोतों और भूजल के व्यावसायिक इस्तेमाल पर शुल्क निर्धारित कर दिया है। अब इसके लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा, जिसकी फीस 5,000 रुपये होगी।
किसे कितना देना होगा शुल्क:
- कोल्ड ड्रिंक्स और मिनरल वॉटर: पानी का मुख्य उत्पाद के रूप में इस्तेमाल करने वाले उद्योगों को 1 रुपये से लेकर 120 रुपये प्रति किलोलीटर की दर से भुगतान करना होगा।
- प्रोसेस इंडस्ट्री: कूलिंग और वॉशिंग जैसे कार्यों के लिए पानी का इस्तेमाल करने वाले उद्योगों (जैसे फैक्ट्रियां) को 1 रुपये से 7 रुपये प्रति किलोलीटर शुल्क देना होगा।
- अन्य व्यावसायिक उपयोग: अन्य श्रेणी के कॉमर्शियल यूज पर 1 रुपये से 20 रुपये प्रति किलोलीटर का चार्ज लगेगा।
सिडकुल की जमीन अब सब-लीज पर दी जा सकेगी
उधमसिंह नगर के प्राग फार्म में आवंटित सिडकुल की जमीन को लेकर भी नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। यहां कुल 1354.14 एकड़ जमीन औद्योगिक इकाइयों के लिए है। पहले पट्टाधारक को ही उद्योग लगाना होता था, और तीन साल में काम शुरू न होने पर पट्टा रद्द हो जाता था।
कैबिनेट ने पुराने फैसले में संशोधन करते हुए पट्टाधारकों को जमीन ‘सबलेट’ (Sub-let) करने का अधिकार दे दिया है। यानी अब पट्टाधारक किसी और को भी जमीन किराए पर दे सकेगा। शर्त यह रहेगी कि जमीन पर उसी श्रेणी का उद्योग लगेगा जिसके लिए वह आवंटित हुई थी। यह प्रक्रिया राजस्व और उद्योग विभाग की सहमति से पूरी होगी।
अन्य अहम फैसले
- जीआरडी यूनिवर्सिटी: राज्य में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ‘जीआरडी उत्तराखंड विश्वविद्यालय’ के गठन को मंजूरी दी गई है।
- ग्रीन हाइड्रोजन: उत्तराखंड ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2026 को कैबिनेट ने पास कर दिया है।
- हवाई पट्टियां: सामरिक महत्व को देखते हुए चिन्यालीसौड़ और गौचर हवाई पट्टी को रक्षा मंत्रालय (Defense Ministry) को सौंपने की मंजूरी दी गई है।
- जनजाति कल्याण: दून, चमोली, यूएसनगर और पिथौरागढ़ में जनजाति कल्याण विभाग के ढांचे के पुनर्गठन को हरी झंडी मिली।









