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Uttarakhand Census Rules 2026 : गलत जानकारी दी तो लगेगा जुर्माना, जानें क्या हैं नए नियम।

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देहरादून, 07 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में आगामी जनगणना को लेकर शासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है, जिसके तहत सूचनाएं छुपाने या गलत तथ्य पेश करने वालों के खिलाफ सीधे आर्थिक दंड की कार्रवाई की जाएगी। जनगणना निदेशालय द्वारा जारी ताजा नोटिफिकेशन (Uttarakhand Census Rules 2026) के अनुसार, यदि कोई नागरिक जानबूझकर गलत डेटा दर्ज कराता है या प्रक्रिया में व्यवधान डालता है, तो उस पर एक हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

राज्य में जनगणना का खाका तैयार हो चुका है और 10 अप्रैल से ‘स्वगणना’ (Self-Enumeration) का चरण शुरू होने जा रहा है। यह शुरुआती प्रक्रिया 15 दिनों तक चलेगी, जिसके बाद 25 अप्रैल से 24 मई तक ग्राउंड लेवल पर भवन गणना का कार्य युद्धस्तर पर किया जाएगा। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि इस दौरान किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सख्त नियमों की फेहरिस्त में केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं। यदि जनगणना ड्यूटी पर तैनात कोई भी कर्मचारी काम करने से इनकार करता है या लापरवाही बरतता है, तो उसे तीन साल तक की जेल की सजा भुगतनी पड़ सकती है। प्रशासन ने इसे अनिवार्य सेवा के रूप में चिन्हित किया है।

जनगणना निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया है कि फील्ड वर्क के दौरान घरों पर नंबर लिखना या पोस्टर चिपकाना अनिवार्य है। यदि कोई मकान मालिक अपने घर से जनगणना का नंबर मिटाता है या पोस्टर फाड़ता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना होगा। बिना अनुमति जनगणना कार्यालयों में प्रवेश करना भी अब दंडनीय अपराध की श्रेणी में आएगा।

इस बार के नियमों में सामाजिक परंपराओं का भी विशेष ध्यान रखा गया है। केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक, जिन क्षेत्रों में महिलाएं अपने पति का नाम नहीं लेतीं या परिवार की महिलाओं का नाम सार्वजनिक नहीं किया जाता, वहां उन्हें नाम न बताने की छूट होगी। यह व्यवस्था मुख्य रूप से उन दूरस्थ इलाकों के लिए है जहां लोक परंपराएं अत्यधिक प्रभावी हैं।

आंकड़ों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार इस बार तकनीक का भी सहारा ले रही है। 2011 की जनगणना के मुकाबले इस बार डिजिटल एंट्रीज पर अधिक जोर है ताकि डेटा के विश्लेषण में समय कम लगे। उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए दुर्गम क्षेत्रों के लिए विशेष टीमों को प्रशिक्षित किया गया है ताकि कोई भी परिवार इस राष्ट्रीय गणना से वंचित न रह जाए।

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