देहरादून, 13 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)
Uttarakhand Congress : उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपनी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी चुनावों में टिकट वितरण के दौरान ‘एक परिवार-एक टिकट’ का नियम सख्ती से लागू किया जाएगा। पार्टी के इस कदम का सीधा उद्देश्य संगठन के भीतर पनप रहे परिवारवाद पर अंकुश लगाना और जमीनी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देना है।
प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा अपने चार दिवसीय उत्तराखंड दौरे के बाद दिल्ली लौट गई हैं। हालांकि उनका प्रवास पांच दिनों का प्रस्तावित था, लेकिन संगठनात्मक फीडबैक और बैठकों का दौर शनिवार शाम तक पूरा कर वह रवाना हो गईं। इस दौरे के दौरान शैलजा ने स्पष्ट संकेत दिए कि पार्टी अब किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत या पारिवारिक दबाव में नहीं आएगी।
दिग्गज नेताओं के समीकरणों पर असर
कांग्रेस के इस नए फार्मूले से प्रदेश के कई कद्दावर नेताओं के राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। उत्तराखंड कांग्रेस में परंपरागत रूप से कई वरिष्ठ नेता चुनाव के दौरान अपने परिवार के सदस्यों के लिए टिकट का दबाव बनाते रहे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कुमारी शैलजा ने स्पष्ट किया है कि भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए केवल जिताऊ और समर्पित चेहरों को ही मैदान में उतारा जाएगा। संगठन का मानना है कि इस निर्णय से आम कार्यकर्ताओं में सकारात्मक संदेश जाएगा और वे अधिक ऊर्जा के साथ काम करेंगे।
गुटबाजी खत्म करने के लिए ‘पांच मंत्र’
प्रदेश प्रभारी ने पार्टी के भीतर जारी गुटबाजी को खत्म करने और कार्यकर्ताओं में नई जान फूंकने के लिए पांच विशेष मंत्र साझा किए हैं। उन्होंने नेताओं को नसीहत दी कि वे ‘मैं’ के अहंकार को त्यागकर सामूहिक रूप से कार्य करें। शैलजा ने कड़े शब्दों में कहा कि नेताओं की असली पहचान उनकी व्यक्तिगत निष्ठा के बजाय पार्टी का चुनाव चिह्न ‘पंजा’ होना चाहिए।
प्रवास का मुख्य उद्देश्य और रणनीति
अपने चार दिनों के प्रवास के दौरान कुमारी शैलजा ने जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक के नेताओं की नब्ज टटोली। उन्होंने आगामी चुनाव के लिए एक रोडमैप तैयार किया है, जिसमें अनुशासन को सर्वोपरि रखा गया है। शनिवार देर शाम वरिष्ठ नेताओं के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक में उन्होंने साफ किया कि संगठन में गुटबाजी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रविवार को उन्हें एनएसयूआई के एक कार्यक्रम में शामिल होना था, लेकिन रणनीति को अंतिम रूप देने के बाद वह शनिवार को ही दिल्ली के लिए रवाना हो गईं।









