Uttarakhand News : उत्तराखंड में मिलावटखोरों के खिलाफ छापेमारी का सिलसिला जोरों पर है। सबसे ज्यादा खाने-पीने की चीजें उत्तर प्रदेश और हरियाणा से आ रही हैं, इसलिए बॉर्डर इलाकों में सतर्कता दोगुनी कर दी गई है। रोज-रोज बड़ी मात्रा में पनीर और मावा जब्त हो रहा है।
फिर भी मिलावटी खाने का धंधा रुकने का नाम नहीं ले रहा। इसीलिए फूड सेफ्टी के अधिकारी पूरे राज्य में, खासकर बॉर्डर एरिया में, लगातार दबिश डाल रहे हैं। अब तक करीब 31 क्विंटल दूध से बने सामान को नेस्तनाबूद कर दिया गया है।
दीवाली का मौसम, मिलावट का खेल
दीपावली के दौरान मिठाइयों का कारोबार आसमान छूता है। इसी बहाने मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं और मिठाइयों व दूध के उत्पादों में जमकर जहर मिलाते हैं। उत्तराखंड सरकार ने साफ संदेश दिया है – मिलावट के धंधे पर ‘जीरो टॉलरेंस’। कोई भी ऐसा कारोबारी नहीं बचेगा जो लोगों की सेहत से खेलने की कोशिश करे।
अब तक की सख्त कार्रवाई
प्रदेशभर में मिलावटी खाने के खिलाफ मुहिम तेज है। सीमाओं पर खास नजर रखी जा रही है, ताकि बाहर से आने वाला मिलावटी मावा और मिठाई अंदर न घुस पाए। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) के मुताबिक, अब तक 250 खाद्य सामान के सैंपल लिए जा चुके हैं। साथ ही 850 किलो पनीर, 500 किलो क्रीम, 875 किलो मिठाई और 900 किलो मावा को नष्ट कर दिया गया है।
आयुक्त का ऐलान: हर कोने में निगरानी
खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त आर राजेश कुमार ने बताया कि दीपावली तक पूरे प्रदेश में स्पेशल टास्क फोर्स की तरह निगरानी टीमें बनाई गई हैं। जहां-जहां मिलावट की शिकायत आ रही है, वहां सरप्राइज चेकिंग हो रही है। हर रोज की रिपोर्ट हेडक्वार्टर आ रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर अभियान को और तेज किया जा सके।
आयुक्त ने लोगों से अपील की कि सस्ती मिठाइयां या खुला मावा न खरीदें। मिठाई लेते वक्त ब्रांड, पैकिंग और एक्सपायरी डेट जरूर देखें। कुमाऊं और गढ़वाल मंडल में टीमें गठित की गई हैं। फूड सेफ्टी ऑफिसरों को सख्त निर्देश हैं कि पुरानी शिकायत वाली जगहों पर जाएं, उन्हें चिन्हित करें और छापा मारें। नई टिप्स मिलने पर भी तुरंत ऐक्शन लें।
मिलावट रोकने के लिए जनता का साथ जरूरी है। अगर कहीं मिलावट दिखे या खाने की क्वालिटी खराब लगे, तो सूचना दें। जनता को जागरूक रहना होगा – रंग-बिरंगी मिठाइयों से दूर रहें, सिर्फ लाइसेंस वाली दुकानों से ही सामान लें।
उपायुक्त की चेतावनी: स्वास्थ्य का दुश्मन है अनहाइजीनिक खाना
खाद्य सुरक्षा विभाग के उपायुक्त गणेश कंडवाल ने कहा कि त्योहारी सीजन में मिठाइयों समेत बाकी खाद्य पदार्थों की डिमांड आसमान छू जाती है। एफडीए पूरे राज्य में अभियान चला रही है और बाजारों में बिकने वाली हर चीज की जांच कर रही है।
“मिलावट की आशंका ज्यादा वाले सामान पर फोकस है, जैसे दूध के उत्पाद, तेल, मसाले। इनके सैंपल लिए जा रहे हैं। तुरंत टेस्टिंग के लिए मोबाइल वैन का इस्तेमाल हो रहा है, विक्रेता और ग्राहक मौके पर ही चेक करवा सकते हैं,” – गणेश कंडवाल, उपायुक्त, खाद्य सुरक्षा विभाग।
टीमों में क्विक रिस्पांस ग्रुप भी है, जो लगातार छापेमारी कर रही है। मार्केट सर्विलांस से पता लगाया जा रहा है कि सप्लाई कहां से आ रही है, ताकि सोर्स पर नजर रखी जा सके। अनहाइजीनिक तरीके से बने खाने सेहत के लिए घातक हैं, इसलिए सैंपल लेने के बाद नष्ट कर दिए जाते हैं। खासतौर पर मैदानी जिलों पर नजर है, क्योंकि यहीं से पहाड़ी इलाकों में सप्लाई होती है।









