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Uttarakhand RERA Rules : उत्तराखंड में घर खरीदारों के लिए खुशखबरी, अब बिल्डर नहीं कर पाएंगे पैसों की हेराफेरी

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उत्तराखंड रेरा ने रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लाने के लिए नया ‘थ्री-अकाउंट सिस्टम’ लागू कर दिया है। अब बिल्डरों को ग्राहकों से मिले पैसे का 70 प्रतिशत हिस्सा एक अलग खाते में रखना होगा, जिसका इस्तेमाल सिर्फ उसी प्रोजेक्ट के निर्माण में किया जा सकेगा। इस सख्त नियम का मकसद प्रोजेक्ट्स में देरी और पैसों की हेराफेरी को रोकना है।

Uttarakhand RERA Rules : उत्तराखंड में अपने घर का सपना देख रहे आम लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। रियल एस्टेट डेवलपर्स अब एक प्रोजेक्ट के नाम पर लिया गया पैसा दूसरे काम में नहीं लगा सकेंगे।

उत्तराखंड रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) ने इस मनमानी पर रोक लगाने के लिए बिल्डरों पर सख्त वित्तीय अनुपालन ढांचा (Financial Compliance Framework) लागू कर दिया है। इसके तहत अब प्रमोटरों को हर प्रोजेक्ट के लिए अनिवार्य रूप से तीन अलग-अलग बैंक खाते खोलने होंगे।

तीन खातों का नया गणित: समझिए कैसे सुरक्षित रहेगा आपका पैसा

रेरा ने पैसों के दुरुपयोग को रोकने के लिए बैंकिंग सिस्टम को तीन हिस्सों में बांट दिया है।

  • कलेक्शन अकाउंट: घर खरीदारों से मिलने वाली बुकिंग राशि, टैक्स और अन्य शुल्क का 100 प्रतिशत पैसा सबसे पहले इसी खाते में जमा होगा।
  • सेपरेट अकाउंट (70%): कलेक्शन अकाउंट से कुल प्रोजेक्ट लागत का 70 प्रतिशत हिस्सा इस खाते में ट्रांसफर होगा। रेरा ने स्पष्ट किया है कि इस खाते का पैसा सिर्फ और सिर्फ जमीन की लागत और निर्माण कार्य (Construction) के लिए इस्तेमाल होगा।
  • ट्रांजेक्शन अकाउंट (30%): शेष 30 प्रतिशत राशि इस तीसरे खाते में जाएगी, जिसे बिल्डर अपने ऑफिस के खर्च या अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए उपयोग कर सकेंगे।

इंजीनियर और सीए की रिपोर्ट के बिना नहीं निकलेगा पैसा

सिर्फ खाते खोलना ही काफी नहीं होगा, बल्कि उनसे पैसा निकालने पर भी रेरा की पैनी नजर रहेगी। रेरा सदस्य नरेश सी. मठपाल के मुताबिक, इन खातों की निगरानी के लिए एक ‘त्रिस्तरीय मैकेनिज्म’ तैयार किया गया है। अब बिल्डर बैंक से पैसा तभी निकाल पाएंगे जब प्रोजेक्ट इंजीनियर, आर्किटेक्ट और चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) काम की प्रगति रिपोर्ट देंगे। यानी जितना काम मौके पर दिखेगा, बैंक उसी हिसाब से पैसा जारी करेगा।

क्यों पड़ी इस सख्त नियम की जरूरत

उत्तराखंड रेरा के अध्यक्ष अमिताभ मैत्रा ने बताया कि रियल एस्टेट में फंड डायवर्जन (पैसों की हेराफेरी) सबसे बड़ी समस्या थी। बिल्डर अक्सर एक प्रोजेक्ट का पैसा दूसरे में लगा देते थे, जिससे प्रोजेक्ट रुक जाते थे और बायर्स को समय पर पजेशन नहीं मिलता था।

हाल ही में राजधानी देहरादून में ‘आर्केडिया हिलाक्स’ प्रोजेक्ट के बिल्डर शाश्वत गर्ग और उनकी पत्नी साक्षी गर्ग द्वारा करोड़ों की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जो अक्टूबर से फरार हैं।

जांच में पता चला कि उन्होंने एक ही फ्लैट कई लोगों को बेचकर और फर्जी लोन लेकर जनता को ठगा। इससे पहले पुष्पांजलि रियल्म्स के दीपक मित्तल ने 400 निवेशकों के 100 करोड़ रुपये हड़प लिए थे। वहीं, सुधीर विंडलास पर भी जमीनों के फर्जीवाड़े में गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई चल रही है। इन मामलों को देखते हुए ही यह नया नियम लागू किया गया है।

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