उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) के एक साल पूरे होने पर सियासी घमासान तेज हो गया है. जहां सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए 4.74 लाख विवाह पंजीकरण का रिकॉर्ड पेश किया, वहीं पूर्व सीएम हरीश रावत ने इसे ‘सनातन धर्म पर हमला’ करार दिया है. रावत ने सरकार को पलायन और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर भी घेरा.
Uttarakhand UCC Anniversary : उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू हुए आज (27 जनवरी) ठीक एक साल पूरा हो गया है. इस मौके पर जहां एक तरफ धामी सरकार आंकड़ों के जरिए अपनी पीठ थपथपा रही है, वहीं विपक्ष ने इसे धर्म से जोड़कर बड़ा हमला बोला है. पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दिल्ली से प्रतिक्रिया देते हुए यूसीसी को सीधे तौर पर सनातन धर्म पर हमला बताया है.
आंकड़ों की जुबानी: 67 से 1400 तक का सफर
सरकार ने अपनी सफलता को साबित करने के लिए विवाह पंजीकरण के चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 19 जनवरी तक यूसीसी लागू होने के एक साल के भीतर कुल 4,74,447 शादियां रजिस्टर हुई हैं.
यह बदलाव कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पुराने कानून में जहां हर दिन सिर्फ 67 पंजीकरण होते थे, अब यह औसत बढ़कर 1,400 प्रतिदिन हो गया है.
सीएम धामी ने बताया कि राज्य में विवाह पंजीकरण प्रक्रिया अब 100% ऑनलाइन हो गई है. अब जोड़े और गवाह दुनिया के किसी भी कोने से अपने रिकॉर्ड अपलोड करके और वीडियो बयान रिकॉर्ड करके आवेदन कर सकते हैं.
‘स्वर्णिम अध्याय’ बनाम सियासी वार
देहरादून में आयोजित पहली वर्षगांठ के कार्यक्रम में सीएम धामी ने कहा कि 27 जनवरी 2025 का दिन उत्तराखंड के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय की तरह दर्ज रहेगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि यूसीसी ने देवभूमि में सामाजिक सद्भाव और समानता की मजबूत नींव रखी है. इसी क्रम में, सरकार ने 26 जनवरी 2026 को राज्यपाल की मंजूरी के बाद यूसीसी (संशोधन) अध्यादेश 2026 भी लागू कर दिया है.
दूसरी ओर, हरीश रावत ने कहा कि बीजेपी चाहे जितनी तारीफ कर ले, सच यह है कि यह कानून सनातन परंपराओं के खिलाफ है. रावत ने बदरीनाथ-केदारनाथ विवाद और मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध जैसी चर्चाओं पर भी टिप्पणी की.
पलायन और रोजगार पर सवाल
पूर्व सीएम रावत ने आरोप लगाया कि धामी सरकार के पास सकारात्मक एजेंडा ही नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकार उत्तराखंड में बढ़ते पलायन, आसमान छूती महंगाई, बेरोजगारी और बिगड़ती कानून व्यवस्था जैसे असली मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है. रावत के अनुसार, अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए ही सरकार प्रतिबंधों और भावनात्मक विषयों पर जनता का ध्यान केंद्रित कर रही है.









