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Women Health Tips : हर उम्र की महिला को जाननी चाहिए पीसीओएस से जुड़ी ये डाइट टिप्स

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Women Health Tips :  महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी सबसे आम समस्याओं में से एक है पीसीओएस (Polycystic Ovary Syndrome)। यह एक ऐसी हार्मोनल स्थिति है जो न केवल पीरियड्स को प्रभावित करती है बल्कि भविष्य में गर्भधारण की क्षमता पर भी असर डाल सकती है।

हाल के आंकड़ों के अनुसार, हर पांच में से एक भारतीय महिला किसी न किसी रूप में पीसीओएस से जूझ रही है। डॉक्टरों के अनुसार, इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन सही जीवनशैली और संतुलित आहार अपनाकर इसके लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

पीसीओएस में शरीर में हार्मोन का असंतुलन हो जाता है और गर्भाशय में छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं। यह समस्या आमतौर पर 15 से 44 वर्ष की उम्र की महिलाओं में देखी जाती है — यानी वही उम्र जब महिलाएं प्रजनन योग्य होती हैं।

गलत खानपान से बढ़ते हैं पीसीओएस और पीरियड पेन के लक्षण

आपका डेली डाइट चार्ट ही यह तय करता है कि पीसीओएस के लक्षण घटेंगे या बढ़ेंगे। कुछ खाद्य पदार्थ इस स्थिति को और खराब कर देते हैं। इसलिए जानिए किन चीजों से बचना चाहिए और किन्हें अपनाना चाहिए।

रिफाइंड फूड्स बन सकते हैं बड़ी समस्या

रिफाइंड फूड्स यानी मैदा, सफेद ब्रेड, पास्ता, केक, बिस्किट, कुकीज़, चिप्स और वेफर्स जैसी चीज़ें शरीर से फाइबर और जरूरी पोषक तत्व छीन लेती हैं।

इनसे इंसुलिन रेजिस्टेंस, सूजन और फैट बढ़ने जैसी समस्याएं होने लगती हैं, जो पीसीओएस के लक्षणों को और गंभीर बना देती हैं।

इनके बजाय दालें, साबुत अनाज, फलियां, मेवे, ताजे फल और सब्जियां अपनी डाइट में शामिल करें। इससे शरीर में फाइबर और जरूरी पोषक तत्वों की भरपाई होती है।

ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट से दूरी बनाएं

हर वसा खराब नहीं होती, लेकिन ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट्स शरीर में सूजन और हार्मोन असंतुलन बढ़ा सकते हैं।

लाल मांस, चीज़, मिठाइयां, प्रोसेस्ड फूड्स और हाई-फैट डेयरी प्रोडक्ट्स से दूरी बनाए रखें। इसके बजाय तिल, सूरजमुखी, जैतून, सोयाबीन और मूंगफली के तेल जैसे हेल्दी ऑयल का इस्तेमाल करें।

ये तेल मोनो-सैचुरेटेड फैटी एसिड्स से भरपूर होते हैं जो हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।

जूस नहीं, साबुत फल खाएं

फलों का जूस हेल्दी दिखता है लेकिन इसमें फाइबर नहीं होता। इससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ती है, जो पीसीओएस के लिए खतरनाक है।

डिब्बाबंद जूस, सोडा, एनर्जी ड्रिंक्स, मॉकटेल्स और शेक्स से पूरी तरह बचें।

बेहतर विकल्प हैं — साबुत फल, हर्बल टी, छाछ, सत्तू या घर पर बनी स्मूदी। ये शरीर को हाइड्रेट भी रखते हैं और ब्लड शुगर कंट्रोल में भी मदद करते हैं।

ग्लूटन और गेहूं का सीमित सेवन करें

कई रिसर्च में यह पाया गया है कि गेहूं और ग्लूटन युक्त भोजन पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में सूजन बढ़ा सकता है। अगर आप रोज गेहूं खाते हैं, तो दिन में एक बार ही इसका सेवन करें।

बाकी समय मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, रागी या दालें खाएं — ये पेट के लिए हल्के और पोषण से भरपूर होते हैं।

हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स फूड्स से बचें

हाई जीआई फूड्स (High Glycemic Index Foods) जैसे सफेद चावल, ब्रेड, आलू, चिप्स और मीठे पेय पदार्थ ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ाते हैं। इससे हार्मोनल बदलाव होते हैं और अनियमित पीरियड्स, मुहांसे और थकान की समस्या बढ़ सकती है।

अगर आप आलू, केला या शकरकंद जैसे हाई जीआई फूड्स खाते हैं, तो उन्हें लो जीआई फूड्स (जैसे दालें, मेवे, बीज, हरी सब्जियां) के साथ खाएं ताकि शुगर स्तर संतुलित रहे।

डॉक्टरों का कहना है कि पीसीओएस में किसी चमत्कारी इलाज की जगह संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, और तनाव से दूरी ही सबसे प्रभावी उपाय हैं।

अगर आप अपने भोजन में थोड़ा ध्यान दें, तो पीरियड पेन से राहत और हार्मोनल संतुलन दोनों पाया जा सकता है।

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