पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग की रिपोर्ट को खारिज किया

इस्लामाबाद, 6 मई (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के परिसीमन आयोग द्वारा गुरुवार को भारत सरकार को अपनी बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद पाकिस्तान ने आक्रामक प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि इसका मकसद जम्मू-कश्मीर के लोगों को उनके अधिकारों से वंचित करना है।

पाकिस्तान ने इसे भारत के अवैध रूप से कब्जे वाले जम्मू एवं कश्मीर (पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर को भारत द्वारा अवैध रूप से कब्जा किया गया क्षेत्र कहता है) की मुस्लिम बहुसंख्यक आबादी को बेदखल करने और अशक्त करने का एक जबरदस्त प्रयास करार दिया है।

परिसीमन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में जम्मू संभाग के लिए 43 विधानसभा सीटों और कश्मीर क्षेत्र के लिए 47 सीटों की सिफारिश की है। आयोग ने विधानसभा में पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओके) के कश्मीरी प्रवासियों और विस्थापितों को प्रतिनिधित्व देने की भी सिफारिश की है।

आयोग की ओर से अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने नाराजगी जताते हुए भारत के चार्ज डी-अफेयर्स यानी प्रभारी राजदूत को तलब किया और परिसीमन आयोग की रिपोर्ट को स्पष्ट रूप से अस्वीकार करने की बात कही।

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने प्रभारी राजदूत से कहा कि परिसीमन आयोग का उद्देश्य जम्मू और कश्मीर की मुस्लिम बहुसंख्यक आबादी को बेदखल और अक्षम करना है।

बता दें कि 2019 में जम्मू एवं कश्मीर से विशेष राज्य दर्जा वापस लेने के बाद से ही पाकिस्तान बौखलाया हुआ है।

पाकिस्तान विदेश कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, भारतीय पक्ष को सूचित किया जाता है कि यह पूरी कवायद हास्यास्पद है और भारत अधिकृत जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक दलों के क्रॉस-सेक्शन द्वारा इसे पहले ही खारिज कर दिया गया है। इस प्रयास के माध्यम से, भारत केवल 5 अगस्त, 2019 के अपने अवैध कार्यों को वैधता देना चाहता है (जब तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य की विशेष स्थिति को हटाते हुए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को रद्द कर दिया गया था)।

बयान में कहा गया है, भारत सरकार की मंशा इस बात से स्पष्ट होती है कि तथाकथित परिसीमन की आड़ में, फिर से डिजाइन किए गए निर्वाचन क्षेत्रों में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व उनके नुकसान के लिए कम कर दिया गया है।

पाकिस्तान का कहना है कि वास्तव में, नई चुनावी सीमाएं कब्जे वाले क्षेत्र के लोगों को और अधिक कमजोर बनाएगी और उन्हें हाशिए पर ले जाने के साथ ही विभाजित भी करेंगी। बयान में आगे कहा गया है कि यह केवल भाजपा-आरएसएस गठबंधन द्वारा समर्थित एक और कठपुतली शासन स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

पाकिस्तान ने भारतीय डीअफेयर्स से अपनी मांग दोहराई कि भारत को यह समझना चाहिए कि जम्मू और कश्मीर विवाद एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विवाद है और यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एजेंडे में एक लंबे समय से चला आ रहा है।

बयान में आगे कहा गया है कि भारत द्वारा मुस्लिम आबादी को हानि पहुंचाने और हिंदू आबादी को अधिक चुनावी प्रतिनिधित्व देने के लिए यह कदम उठाया गया है, जो कि एक अवैध, एकतरफा और शरारती प्रयास है। पाकिस्तान ने इसे लोकतंत्र, नैतिकता और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत भारत के दायित्व के सभी मानदंडों का मजाक करार दिया है।

पाकिस्तान ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत सरकार को जम्मू-कश्मीर में अवैध जनसांख्यिकीय परिवर्तन लाने से बचना चाहिए। इसने जम्मू-कश्मीर के उत्पीड़न को तत्काल रोकने का आह्वान भी किया।

विदेश कार्यालय के बयान में अपील करते हुए कहा गया है, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों में निहित संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह के माध्यम से कश्मीरी लोगों को अपना भविष्य निर्धारित करने दें।

–आईएएनएस

एकेके/एसकेपी

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