ऋषिकेश, 08 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। देवभूमि की मर्यादा को ताक पर रखकर गंगा के पावन तट पर शराब पीना एक महिला पर्यटक को भारी पड़ गया, लेकिन शर्मिंदा होने के बजाय महिला ने पुलिसकर्मियों के साथ ही मोर्चा खोल दिया। हरियाणा से आई इस महिला का वीडियो अब इंटरनेट पर तेजी से फैल रहा है, जिसमें वह अपनी गलती मानने के बजाय पुलिस को ही ज्ञान देती नजर आ रही है।
महिला को जब घाट पर तैनात पुलिसकर्मियों ने सार्वजनिक स्थल और पवित्र नदी के किनारे शराब पीने से मना किया, तो वह उग्र हो गई। बहस के दौरान महिला ने पुलिसकर्मियों के मुंह पर कहा कि ऋषिकेश के स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी काफी हद तक पर्यटन पर निर्भर है। उसका तर्क था कि अगर पर्यटक नहीं आएंगे तो यहां के लोगों को खाना नहीं मिलेगा, इसलिए पर्यटकों को इस तरह से “निशाना” नहीं बनाया जाना चाहिए।
वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों ने संयम बरतते हुए महिला को समझाने की कोशिश की कि ऋषिकेश की धार्मिक संवेदनशीलता और स्थानीय कानून गंगा किनारे किसी भी नशीले पदार्थ के सेवन की अनुमति नहीं देते। वीडियो में पुलिसकर्मी साफ तौर पर यह कहते सुने जा सकते हैं कि यह स्थान बेहद पवित्र माना जाता है और यहां ऐसी गतिविधियां पूरी तरह वर्जित हैं। जैसे-जैसे बहस बढ़ी, वहां स्थानीय लोगों और अन्य पर्यटकों की भीड़ जमा होने लगी, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।
इस बीच स्थिति बिगड़ती देख महिला के पति ने हस्तक्षेप किया। पति ने बीच-बचाव करते हुए महिला को वहां से हटाकर दूर ले जाने की कोशिश की, जिसके बाद मामला किसी तरह शांत हुआ। बता दें कि ऋषिकेश नगर निगम क्षेत्र और घाटों के आसपास मांस-मदिरा पर कानूनी रूप से पूर्ण प्रतिबंध लागू है। पुलिस प्रशासन समय-समय पर ‘ऑपरेशन मर्यादा’ जैसे अभियान चलाकर ऐसे तत्वों पर कार्रवाई भी करता है।
सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। एक यूजर ने कड़ी टिप्पणी करते हुए लिखा कि यह शराब का नहीं बल्कि पैसे और रसूख का नशा है, जो इन्हें लगता है कि वे कुछ भी करके बच जाएंगे। वहीं एक अन्य यूजर ने कहा कि पर्यटकों को यह गलतफहमी पालना बंद कर देना चाहिए कि वे यहां आकर किसी पर अहसान कर रहे हैं; यह किसी का घर और आस्था का केंद्र है, कोई बिकाऊ संपत्ति नहीं।
इंटरनेट पर कई लोगों ने मांग की है कि ऐसे उद्दंड पर्यटकों पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ उनके पहाड़ों में प्रवेश पर भी पाबंदी लगानी चाहिए। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पर्यटन स्वागत योग्य है, लेकिन इसे आस्था और संस्कृति की बलि देकर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।









