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केदारनाथ के कपाट बंद होने की तारीख तय, जानिए पूरा शेड्यूल

केदारनाथ धाम के कपाट 11 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद होंगे। तुंगनाथ और मदमहेश्वर की तारीखें भी घोषित, जानिए पूरी जानकारी।

रुद्रप्रयाग (20 अक्टूबर) : उत्तराखंड के प्रसिद्ध पंचकेदार धामों के कपाट बंद होने की आधिकारिक तिथियां विजयदशमी पर्व पर घोषित कर दी गई हैं। इसके तहत विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट 11 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे, जिसके बाद श्रद्धालु आगामी महीनों में भगवान के शीतकालीन गद्दीस्थलों पर दर्शन कर सकेंगे।

शीतकालीन गद्दीस्थलों के लिए रवाना होंगी उत्सव डोलियां

विजयदशमी के पावन अवसर पर पंचांग गणना के आधार पर पंचकेदार के प्रमुख धामों की कपाट बंद होने की तिथियां सामने आ चुकी हैं। मंदिर समिति से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, केदारनाथ धाम के कपाट 11 नवंबर को सुबह 8:30 बजे शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। इसके बाद बाबा केदार की चल विग्रह उत्सव डोली फाटा और गुप्तकाशी होते हुए अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ के लिए प्रस्थान करेगी। डोली प्रभारी डीएस भुजवाण ने बताया कि इस प्रक्रिया के साथ ही धाम में इस वर्ष की यात्रा के अंतिम चरण की तैयारियां शुरू हो गई हैं।

तुंगनाथ और मदमहेश्वर धाम की तिथियां तय

उत्तराखंड की ऊंची पहाड़ियों पर स्थित अन्य पंचकेदार धामों का शेड्यूल भी जारी कर दिया गया है। हिमालय में सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट आगामी 6 नवंबर को विधि-विधान के साथ बंद होंगे। इसके पश्चात 8 नवंबर को उनकी चल विग्रह उत्सव डोली मक्कूमठ पहुंचेगी। वहीं, द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर धाम के कपाट 16 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे।

मदमहेश्वर की उत्सव डोली गौंडार, रांसी और गिरिया से होते हुए 19 नवंबर को ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ पहुंचेगी, जहां वेदपाठी विश्व मोहन जमलोकी की देखरेख में शीतकालीन पूजा संपन्न होगी।

शीतकाल में ऊखीमठ और मक्कूमठ में होंगे दर्शन

कपाट बंद होने की इन घोषणाओं के साथ ही प्रशासन और मंदिर समिति ने शीतकालीन पूजा की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। सर्दियों के मौसम में जब भारी बर्फबारी के कारण मुख्य धामों के मार्ग बंद हो जाते हैं, तब भगवान की मूर्तियां और उत्सव डोलियां उनके तय शीतकालीन गद्दीस्थलों पर विराजमान होती हैं।

अब श्रद्धालु ऊखीमठ और मक्कूमठ में शीतकाल के दौरान नियमित रूप से भगवान के दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे, जिससे सर्दियों में भी धार्मिक पर्यटन और स्थानीय व्यवस्थाएं सुचारू बनी रहें।

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