हरिद्वार होमगार्ड भर्ती में मेरिट के अतिरिक्त अंकों के लिए एआई से फर्जी मार्कशीट बनाने का खुलासा हुआ है। 20 अभ्यर्थियों के आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं।
हरिद्वार (23 अक्टूबर) : सरकारी नौकरी की मेरिट सूची में अतिरिक्त अंकों का अनुचित लाभ उठाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल कर जाली मार्कशीट तैयार करने की एक संगठित कोशिश हरिद्वार में पकड़ी गई है। होमगार्ड के 227 पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया के दौरान जब 11 हजार आवेदकों के दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन शुरू हुआ, तो स्क्रूटनी टीम के सामने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के 20 से अधिक ऐसे प्रमाणपत्र आए जो संदिग्ध और एआई टूल्स से तैयार प्रतीत हुए।
विभाग ने त्वरित प्रशासनिक फैसला लेते हुए इन सभी 20 संदिग्ध अभ्यर्थियों के आवेदन तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए हैं और अब संबंधित थानों में मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
एआई टूल्स से छेड़छाड़ कर बनाए फर्जी अंकपत्र
भर्ती बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, होमगार्ड सेवा नियमावली के तहत उच्च शैक्षिक योग्यता और विशेष प्रमाणपत्रों पर अभ्यर्थियों को मेरिट में वेटेज यानी अतिरिक्त अंक दिए जाते हैं। इसी का फायदा उठाने के लिए अभ्यर्थियों ने मूल बोर्ड के फॉन्ट, क्यूआर कोड और सील-मुहरों को आधुनिक इमेज-जेनरेटर और एआई एडिटिंग सॉफ्टवेयर से हूबहू कॉपी किया। जब सत्यापन टीम ने संबंधित शिक्षा बोर्डों के डेटाबेस और रोल नंबरों का क्रॉस-वेरिफिकेशन किया, तो रिकॉर्ड मेल नहीं खाए।
होमगार्ड के मंडलीय कमांडेंट गौतम कुमार ने स्पष्ट किया कि सत्यापन प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जा रही है। किसी भी स्तर पर दस्तावेजों में हेरफेर बर्दाश्त नहीं होगी और संदिग्ध पाए गए सभी अभ्यर्थियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की रूपरेखा तैयार कर ली गई है।
नीट कांड के बाद होमगार्ड भर्ती में सेंधमारी
उत्तराखंड में हाल ही में उजागर हुए नीट एमबीबीएस फर्जी प्रमाणपत्र प्रकरण के बाद से भर्ती आयोगों और विभागों में दस्तावेजों की जांच को लेकर सतर्कता पहले से ही बढ़ा दी गई थी। हरिद्वार जिले में होमगार्ड भर्ती के लिए कुल 227 पदों के सापेक्ष करीब 11 हजार युवाओं ने आवेदन किया था, जिससे एक-एक पद पर भारी प्रतिस्पर्धा बन गई थी। सीमित पदों के बीच कट-ऑफ में आगे निकलने के लिए साइबर कैफे या तकनीकी गिरोहों की मदद से इस तरह के फर्जीवाड़े को अंजाम देने की आशंका जताई जा रही है।
विभाग अब इस बात की तहकीकात कर रहा है कि क्या यह कुछ अभ्यर्थियों का व्यक्तिगत कदम था या इसके पीछे कोई पेशेवर फर्जीवाड़ा गिरोह काम कर रहा है जो युवाओं से मोटी रकम लेकर एआई-जनरेटेड दस्तावेज तैयार कर रहा था।
फर्जीवाड़े में शामिल चेहरों पर कानूनी शिकंजे की तैयारी
प्रशासन अब इन निरस्त आवेदनों के आधार पर संबंधित अभ्यर्थियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और सरकारी प्रक्रिया को गुमराह करने से जुड़ी सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज कराने का कदम उठा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पुलिस जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि ये डिजिटल दस्तावेज किस कंप्यूटर सेंटर या सॉफ्टवेयर के जरिए तैयार कराए गए थे। विभाग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में शेष बचे अभ्यर्थियों के चरित्र प्रमाण पत्र और अन्य मूल दस्तावेजों का भी सघन डिजिटल ऑडिट कराया जाएगा, ताकि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे।









