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उत्तराखंड में 32 प्रधानाध्यापक बने इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य, आदेश जारी

उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा विभाग ने 32 प्रधानाध्यापकों को प्रधानाचार्य बनाया। देहरादून को 12 तो चमोली-टिहरी को 1-1 तैनाती, 15 दिन में जॉइनिंग का सख्त आदेश।

देहरादून (14 अक्टूबर) : उत्तराखंड के राजकीय इंटर कॉलेजों में वर्षों से खाली पड़ी प्रधानाचार्य की कुर्सियों पर आखिरकार स्थायी तैनाती शुरू हो गई है। विद्यालयी शिक्षा विभाग ने अध्यापन संवर्ग के 32 प्रधानाध्यापकों को पदोन्नति देकर राजकीय बालक एवं बालिका इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य बना दिया है। विभागीय मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के अनुमोदन के बाद शिक्षा सचिव ज्योति यादव ने इसके विधिवत आदेश जारी कर दिए हैं।

हालांकि, इस पदोन्नति सूची में मैदानी और पर्वतीय जिलों के बीच बड़ा असंतुलन भी सामने आया है। अकेले राजधानी देहरादून को 12 नए प्रधानाचार्य मिले हैं, जबकि चमोली और टिहरी जैसे विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले सीमांत पर्वतीय जिलों के हिस्से महज एक-एक पद आया है। शासन ने सभी नवनियुक्त अधिकारियों को 15 दिन के भीतर अनिवार्य रूप से कार्यभार ग्रहण करने का अल्टीमेटम दिया है।

देहरादून को मिले 12 प्रधानाचार्य, पहाड़ में सिर्फ एक

शासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार, पदोन्नति कोटे के तहत रिक्त पदों पर की गई इस तैनाती में सुगम और मैदानी क्षेत्रों का दबदबा साफ नजर आ रहा है। कुल 32 पदोन्नत प्रधानाचार्यों में से एक दर्जन यानी 12 प्रधानाचार्यों को केवल देहरादून जनपद के विभिन्न इंटर कॉलेजों में भेजा गया है। हरिद्वार जनपद को 5 और नैनीताल को 4 प्रधानाचार्य मिले हैं। वहीं ऊधमसिंह नगर, पौड़ी और उत्तरकाशी जनपद में 3-3 प्रधानाचार्यों की तैनाती की गई है।

इसके उलट, पर्वतीय क्षेत्र के चमोली और टिहरी जनपद में केवल 1-1 प्रधानाचार्य को भेजा गया है। शिक्षा महकमे में इस असमान वितरण को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई है, क्योंकि पहाड़ के दूरस्थ इलाकों में शिक्षकों और प्रशासनिक प्रभारियों की कमी लंबे समय से सबसे बड़ा मुद्दा रही है।

सालों से अटकी पदोन्नति, प्रभारी भरोसे थे स्कूल

प्रदेश के राजकीय इंटर कॉलेजों में नियमित प्रधानाचार्यों की भारी कमी के कारण अधिकांश विद्यालय लंबे समय से प्रभारी व्यवस्था के सहारे संचालित हो रहे थे। वरिष्ठ प्रवक्ताओं या उप-प्रधानाचार्यों को विद्यालय का कामकाज सौंपा गया था, जिससे वित्तीय और प्रशासनिक निर्णय अटके पड़े थे। पदोन्नति की प्रक्रिया विभिन्न संवर्ग विवादों और विभागीय प्रक्रियाओं के कारण सालों से लंबित चल रही थी।

विभागीय मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इस फैसले पर मुहर लगाते हुए कहा कि 32 प्रधानाध्यापकों को पदोन्नत कर प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी सौंपने से स्कूलों में शैक्षणिक अनुशासन और प्रशासनिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थायी मुखिया मिलने से विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था चुस्त होगी और छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास में सीधे मदद मिलेगी।

पंद्रह दिन में कार्यभार संभालने का कड़ा निर्देश

शिक्षा सचिव ज्योति यादव द्वारा जारी शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी पदोन्नत प्रधानाचार्यों को अपने नवीन तैनाती स्थल पर एक पखवाड़े (15 दिन) के भीतर अनिवार्य रूप से पदभार ग्रहण करना होगा। किसी भी स्तर पर हीलाहवाली या तैनाती स्थल में फेरबदल के दबाव को रोकने के लिए शासन ने सख्त रुख अपनाया है।

आदेश के तहत सभी जनपदों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों (सीईओ) को निर्देशित किया गया है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्यभार ग्रहण कराने की अनुपालन रिपोर्ट तत्काल शासन को भेजी जाए। शिक्षा विभाग का मानना है कि बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियों के बीच प्रधानाचार्यों की स्थायी मौजूदगी से कॉलेजों में शिक्षकों की उपस्थिति और पठन-पाठन की निगरानी मजबूत होगी।

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